प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए इन 6 टिप्स को करें फॉलो

मनोवैज्ञानिक और कॅरियर काउंसलर नूरजहां खान के 6 टिप्स

एजुकेशन डेस्क। युवा पीढ़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी हुई है। कोचिंग के माध्यम से वे युवा अपने लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश का रहे हैं। जो चूके फिक्र उनकी उड़ान की है। वे अपने लिए नए सपने, नई राहें तलाश सकें, यह उनका है। इन सपनों को पूरा करने के लिए मनोवैज्ञानिक और कॅरियर काउंसलर नूरजहां खान के बताएं यह 6 खास टिप्स।

गौरव पढ़ाई में औसत था लेकिन उसका मन संगोत में रमता था। 12वीं पास करने के बाद उसने घर पर अपने सपनों के बारे में त की तो नादान समझकर बी.कॉम में एडमिशन करा दिया गया। बीच में एक वर्ष मात्र हो हुआ। जैसे-तैसे गैज़ाशन पूरा हुआ तो प्रतियोगी परीक्षाओं को तैयारी में झोंक दिया गया। वह नाकामयाब होने के बाद वह अक्सादग्रस्त है। संगीत से उसका नाता टुट का है। ज्या फिर उसे सपनों के पंथ नसें दिए जाने चाहिए? 

प्रतियोगिता का दल-दल 
वर्ष 2017 में यूपीएससी प्रवेश परीक्षा के लिए क्ररीब दस लाख लोगों ने आवेदन दिया था और पोस्ट थ महज 980। यहीं छल का ताड़ की प्रतियोगी परीक्षा का है। कुछ मन में | तो कुछ बेमन से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं को एक आजमाइश के तौर पर देखना | उचित होता है। इसमें सन सेना ने जिदी नहीं है। सितारों
से आगे जहां और भी है...।

स्वच्छंद उडान का वक्त 

अमूमन युवा जोखिम लेने से घबराते नों। वे कुछ नया करें, कुछ हटकर करें। सपनों के पीछे दौड़ना उन्हें जनुन से भर देता है। नई चीजें, नए शो उन्हें आकर्षित करते रहते हैं। लेकिन वों बड़ों का अनुभव कहता है कि जिंदगी भरता में है क्योंकि उन्हें दगी का अनुभव अधिक है। तयशुदा न से, नौकरी को लेकर निश्चितता से आदि तमाम रय होती हैं। लेकिन अगर यह चिंता दबाव में तब्दील होने लगे, तो मुश्किलें पैदा चे स्क्रती हैं। 

सरकारी नौकरी ही क्यों? 

जब भी कॅरियर चुनाव की बात होती है तो उसे चुनने के लिए चार मानी पर उसे तय किया जाता है। पहला सामान्यतः पैसा, अर्थ धिन संध व्यथे। दुसरा प्रसिद्धि क्योंकि सभी अपने काम के लिए प्रसिद्ध होने की उमझा रखते हैं। तीसरा क्रत, क्योंकि रुसम्मन और आंधकार इसके आने से मिलने लगता है। आर आखिरी लोग, क्योंकि हम किसी न किसी रूप में समाज में अपना योगदान दे रहे हैं। मान्य नौकरियं या दूसरे कैरियर ऑप्शन इन मानकों पर पूर्णतः पुरे नहीं उतरते लेकिन एक सरकारी नौकरी में में मारे गुण पाए जाते हैं।

युवा मन समझना है जरूरी कभी परीक्षा के शुरुआती चरण में से रह जाना वा अंतिम इंटरव्यू में बाहर हो जाना छात्रों का आत्मविश्वास डगमगा देता है और फिर से परीक्षा में फेल होने का डर उन्हें सताने लगता है। हर व्यक्ति प्रशासक या बंधक बनने के लिए पैदा | नसें शैता है। सभी को अपनी व्यक्तिगत स्वामियां होती हैं। वे यदि अपने टैलेट को पहचानकर काम करेंगे तो निश्चित ही उसमें अपना सर्वप्ठ प्रदर्शन करेंगे। परीक्षाओं में पास होने के बाव के कारण कई बार बच्चे माता-पिता से दूर होने लगते हैं चिड़चिडे, !गुस्सैल और झगड़ालू प्रवृत्ति के | बनने लगते हैं।

बड़ों का अनुभव भी है जरूटी 

माता-पिता और बड़ हो ख में अनभव का स्मा होता हैं। लेकिन वे केवल इसे ही अपने जीवन का जरिया न मानकर चलें। क्ह त ने रास्तों में से एक है। आर
ह्यं सफलता न मिली तो वाकी रास्ते तई भी ले झए हैं। माता-पिता की बच्चों और कॉलेज के शिक्षकों और कैरियर काउंसलर से बातचीत होती रहनी चाहिए ताकि वे जागरूक भी हों। कई बार वयों के पदाई से इतर प्रदर्शन के बारे में माता-पिता अवगत नहीं रहते। प्रतियोगी परीक्षाएं ही सक्छ नहीं हैं। इसके सर भी एक दुनिया है जत्यं बेहतर जीवन के अनेक विकल्प मौजुद हैं।

केवल एक पक्ष जिम्मेदार नहीं 

युवाओं को भी चएि कि जैसे अपने स्कूल, कॉलेज या दोस्तों और परोक्षा परिणाम के बारे में बात करते हैं वैसे ही अपने कॅरियर पर भी खुलकर बात करें, अपने सपनों के बारे में बताएं। पहले अपने रास्तों के हर चरण पर जुत्र सोच बिचार कर लें। ध्यान रखें कि 12ची या कॉलेज के बाद अचानक लिए गए आपके कैसने माता-पिता को मश्कल में कुल सकते हैं। उनके सामने अपनी योजना अखें और अव विकल्पों पर भी बात करें। फिर एकएक कर उन पर अमल करते जाएं।
आप समझा सकने में सफल । न हाँ, तो काउंस | की मदद ले सकते हैं।
 

Next News

जानें परीक्षा पैटर्न और कैसे करें IBPS PO के एग्जाम की तैयारी 

इस साल 13 अक्टूबर को यह परीक्षा 3562 पदों के लिए आयोजित होने वाली है।

कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कॅरिअर के अच्छे मौके देती है कोरियन लैंग्वेज

पोस्को और सैमसंग जैसी कंपनी भी स्टूडेंट्स को फेलोशिप देती हैं। 

Array ( )