जमीन से जुड़कर करें मुश्किलों का सामना : रोहित शेट्ट

कामयाबी का कोई निश्चित तरीका नहीं है।

First Person।  मेरे पिता एम बी शेट्टी प्रसिद्ध एक्शन डायरेक्टर और एक्टर थे। बचपन से ही मैं उनके जैसा बनना चाहता था, लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था। मैं बमुश्किल 5-6 साल का था, जब मेरे पिता की मृत्यु हो गई थी। इसके चलते बेहद कम उम्र में ही मेरा संघर्ष शुरू हो गया था। महज 15 साल की उम्र से ही मैंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। हालांकि मुझे इस काम में मजा आ रहा था। उस वक्त मुझे सैलरी के रूप में सिर्फ 35 रुपए मिलते थे। रोजाना लोकल ट्रेन से लंबी यात्रा, आर्थिक परेशानियां और तमाम मुश्किलों के बीच मेहनत का यह सफर जारी रहा। लेकिन मेरा रवैया हमेशा सकारात्मक रहा।

मैं कभी भी इन बातों को लेकर शिकायती नहीं होता था। न ही यह सोचता था कि मेरे साथ कुछ खराब हो रहा है। इसके बजाय मैंने लगातार अपने काम पर फोकस किया। छोटे से छोटे काम को भी कभी मैंने हीन भाव से नहीं देखा और अब 25 साल से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद आज भी मैं अपने काम के लिए उतना ही उत्साहित हूं। मुझे लगता है अपने काम के प्रति यही अप्रोच हमें सफलता के नजदीक ले जाती है। हालांकि कामयाबी का कोई निश्चित तरीका नहीं है। हमें बस इतना ख्याल रखना चाहिए कि हम अपना काम बेहद ईमानदारी से करें। इसके अलावा मैंने अपनी जिंदगी से यही सीखा है कि हम जितना जमीन से जुड़े रहते हैं उतनी ही हमारी मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत बनी रहती है।

सफलता कई दबाव लेकर आती है

फिल्म बनाने से लेकर एक्टिंग तक के काम को ग्लैमर से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह उतना आसान काम नहीं है जितना कि दिखाई देता है। हम कई-कई महीनों तक सो नहीं पाते। हर रोज पैकअप के बाद भी रिहर्सल करते हैं और हर दिन शूट करते हैं। इसके बावजूद हर फिल्म सफल नहीं होती और जो होती हैं उनके साथ ज्यादा सावधानी बरतनी होती है। असल में जब आप सफल होते हैं तो आपको और ज्यादा मेहनत करनी होती ताकि आप कामयाबी को मेंटेन कर पाएं। यह दबाव हमेशा हमारे साथ बना रहता है।

बेहतर इंसान भी बनें

शूटिंग के दौरान मैंने कपड़े प्रेस करने से लेकर हेयर ड्रेसिंग जैसे काम भी किए हैं। मैं जानता हूं कि ये सभी काम कितने मुश्किल हैं, यही वजह है कि मैं स्पॉट बॉयज का विशेष रूप से सम्मान करता हूं। टीम के रूप में वे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना कि काेई अन्य। याद रखें जब आप एक ताकतवर भूमिका में होते हैं तो जो बात आपको एक बेहतर व्यक्ति बनाती है वह यह है कि उस दौरान आप अपने जूनियर्स से कैसे पेश आते हैं। उन्होंने आपका खराब वक्त भी देखा होता है, इसके बावजूद अगर वे आपके साथ खड़े हैं तो आपको उनकी अहमियत समझनी चाहिए। जहां तक क्रिटिसिज्म की बात है तो उससे सामना हर काम में होगा। लगातार अपनी कमजोरियों पर काम करें, धीरे ही सही, लेकिन इसके परिणाम आपको मिलेंगे।

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