सिविल सर्विसेज एग्जाम : इन आदतों को अपनाकर पा सकते हैं अपना मुकाम

इसमें सफलता पाने के लिए तैयारी और किस्मत ही काफी नहीं होती। इसके लिए जरूरी हो जाता है कि उम्मीदवार आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली ही बना डाले। इसकी तैयारी का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है।

सिविल सर्विसेज एग्जाम : इन आदतों को अपनाकर पा सकते हैं अपना मुकाम

स्टडी टिप्स । सिविल सर्विसेज एग्जाम या आईएएस एग्जाम को सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इसमें सफलता पाने के लिए तैयारी और किस्मत ही काफी नहीं होती। इसके लिए जरूरी हो जाता है कि उम्मीदवार आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली ही बना डाले। इसकी तैयारी का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं है। आईएएस की तैयारी को अपनी जीवनशैली में शामिल करने के लिए जरूरी है इन आदतों को अपनाना।

टाइमटेबल बनाएं
आईएएस परीक्षा में सफल होने के लिए टाइमटेबल बनाना बहुत जरूरी है। आपका टाइमटेबल ऐसा हो, जो पढ़ाई के घंटों, आराम, फिजिकल एक्टिविटी और सोशल लाइफ सभी के बीच संतुलन बनाकर चले। सारा समय सिर्फ पढ़ाई करते रहने से आप बोर हो जाएंगे और पढ़ाई में आपका मन ही नहीं लगेगा। इसके साथ ही, आप दो-तीन अलग-अलग टाइम शेड्यूल बना लें, जिनमें आपकी पढ़ाई के दैनिक, वीकली और मंथली लक्ष्य निर्धारित हों। इससे आप अपनी तैयारी की निगरानी कर पाएंगे और जहां जरूरी हो, वहां सुधार भभ् क्श्र सकेंगे।

कॉन्सेप्ट क्लियर रखें
आईएएस परीक्षा का सिलेबस बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में कई उम्मीदवार तथ्यों को रट लेते हैं, बजाय उनका कॉन्सेप्ट समझने के। यह तरीका बिल्कुल गलत है। हमारी याददाश्त केवल एक सीमित डेटा ही स्टोर कर सकती है और यह भी समय के साथ हम भूलने लगते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप जो भी पढ़ें, उसका कॉन्सेप्ट आपको पता हो। अगर आप किसी टॉपिक को अच्छी तरह समझ लेंगे, तो उससे जुड़ी तमाम जानकारी अच्छी तरह याद भी रख पाएंगे।

राइटिंग स्किल सुधारें
कई बार उम्मीदवार केवल प्रिलिमिनरी एग्जाम पर ही फोकस करते हैं, जोकि ऑब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है। शुरू-शुरू में यह रणनीति सही लग सकती है लेकिन आगे चलकर आपको अहसास होगा कि यह गलत है। आईएएस की मेन परीक्षा परंपरागत सब्जेक्टिव टाइप परीक्षा है, जिसमें आपको हाथ से उत्तर लिखने होंगे। इसलिए अगर आप मेन परीक्षा में भी सफल होना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि आप प्रिलिम्स स्तर से ही अपनी राइटिंग स्किल में निखार लाना शुरू कर दें। कई जानकारों का मत है कि लिखकर पढ़ाई करना न सिर्फ तथ्यात्मक सूचनाओं को याद रखने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक है, बल्कि यह उत्तरों का फॉर्मेट विकसित करने में भी मददगार है, जोकि मेन परीक्षा में लाभ देता है।

अखबारों से दोस्ती
अखबार किसी आईएएस उम्मीदवार के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। आपको रोज अखबार पढ़ने की आदत डालनी ही चाहिए। मगर इतना ही काफी नहीं है। आपको उन टॉपिक्स की पहचान भी होनी चाहिए, जिन पर आपको ज्यादा फोकस करना है। अखबार पढ़ना शुरू करने से पहले खुद से पूछें कि आपको क्या पढ़ना चाहिए, क्यों पढ़ना चाहिए और कहां पढ़ना चाहिए। इस प्रकार आप वही पढ़ेंगे, जो पढ़ना जरूरी है और रोज-ब-रोज आवश्यक सूचनाएं इकट्ठी करते चलेंगे।

क्वॉलिटी डिस्कशन
किसी आईएएस उम्मीदवार को अपने साथी उम्मीदवारों और टीचर्स व कोचिंग इंस्ट्रक्टर्स के साथ डिस्कशन करते रहना चाहिए। इन चर्चाओं में किसी एक टॉपिक पर फोकस करें, उसे अलग-अलग नजरियों से देखें। किसी टॉपिक पर अलग-अलग नजरिये सामने आने पर आप परीक्षा में अध‍िक संतुलित और परिपूर्ण उत्तर दे पाएंगे। ऐसे किसी डिस्कशन ग्रुप का सदस्य बनने से पढ़ाई के लिए प्रेरणा भी मिलती रहती है। साथ ही इससे इंटरव्यू की तैयारी में भी मदद मिलती है।

प्रॉब्लम सॉल्विंग एटिट्यूड
परीक्षा में सफल होने के लिए ही नहीं, आईएएस अध‍िकारी के रूप में काम करने के दौरान भी आपको प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल की जरूरत होती है। आपको सिलेबस को पढ़ने, टाइम मैनेजमेंट, संसाधनों, पियर प्रेशर, समाज के प्रेशर आदि की चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। ऐसी स्थितियों में आपका प्रॉब्लम सॉल्विंग एटिट्यूड ही काम आएगा।

अपने टीचर खुद बनें
आईएएस की तैयारी करना बहुत लंबा और थका देने वाला काम है। इसका सिलेबस मानो लगातार बढ़ता जाता है। और समय लगातार कम होता जाता है। ऐसे में किसी एक टीचर, गाइड, मेंटर या किसी एक कोचिंग क्लास मटेरियल पर निर्भर रहने से बात नहीं बनने वाली। आपको खुद अपना टीचर बनना होगा। आप खुद ही सवाल तैयार करें और रेफरेंस तथा स्टडी मटेरियल के इस्तेमाल से उनके उत्तर तलाशें। टीचर और स्टूडेंट दोनों की भूमिकाएं खुद निभाने से आपके भीतर आत्मविश्वास आएगा जो किसी भी एग्जाम में सफल होने के लिए जरूरी है ।

स्वस्थ जीवनशैली
खुद को कमरे में बंद करके आज तक कोई आईएएस परीक्षा क्लियर नहीं कर पाया है। आपको अपने स्वास्थ्य, मनोरंजन तथा सामाजिक जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए। योग, ध्यान या फिर रनिंग, स्पोर्ट्स आदि के लिए रोज समय जरूर निकालें। पौष्टिक भोजन और रोज कम से कम 8 घंटे की नींद लें। परिवार के साथ तो समय बिताएं ही, ऐसे दोस्त भी बनाएं जिनके लक्ष्य आपसे मिलते-जुलते हों। इससे आपका फोकस बना रहेगा और आपको प्रेरणा मिलती रहेगी।

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