अपने निर्णय खुद करें और संजीदा रहें - श्वेता त्रिपाठी

अभिनेत्री हाल ही गॉन केश नामक फिल्म में नजर आकर चर्चा में है

FirstPerson। बचपन से ही थिएटर मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसका कारण था मेरे माता-पिता का यह मानना कि थिएटर बच्चों को कॉन्फिडेंट बनाता है। कॅरिअर के नजरिए से नहींं, लेकिन ओवरऑल ग्रोथ के लिए उन्होंने मुझे थिएटर भेजा। हमारा फिल्म इंडस्ट्री से कोई संबंध नहीं था, लेकिन मेरा पूरा परिवार नाटक और संगीत में रुचि रखता था। मेरे माता-पिता मुझे हर वह काम करने देना चाहते थे जिसे करके मैं खुद को बेहतर और कॉन्फिडेंट महसूस करवा सकूं। मुझे हमेशा से ही अपने पसंद की चीजें सीखने की पूरी स्वतंत्रता थी। इसके चलते मैंने क्लासिकल डांस भी सीखा। मैं जब भी अपने बारे में बात करती हूं, तो यह जरूर बताती हूं कि मेरे माता-पिता की स्वतंत्र सोच का ही नतीजा है कि मैं जीवन में कुछ कर पाई हू

मेरी सफलता में पेरेंट्स का बड़ा रोल
मैं मानती हूं कि हमारी सफलता और विफलता में बहुत बड़ा हिस्सा हमारे माता पिता का भी होता है। जब मैंने अपने पिता को पहली बार बताया कि मैं एक्टर बनना चाहती हूं, तो उन्होंने बहुत सहज भाव से कहा कि मैं जो कुछ बनना चाहती हूं, इसका निर्णय मैं खुद कर सकती हूं, लेकिन मुझे अपने काम को बहुत संजीदगी से लेना होगा। यह बहुत जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों की बात को समझें और उन्हें कॅरिअर का चुनाव करने दें। हमारे जीवन पर उन बातों का बहुत असर होता है जो हमारे पेरेंट्स हमें कहते हैं।

जॉब की तलाश में ऑडिशन दिया और सलेक्ट हो गई
2008 के करीब जॉब की तलाश में मेरा मुम्बई आना हुआ। अचानक एक दिन पता चला कि डिज्नी चैनल के एक शो के लिए ऑडिशन हो रहे हैं। शौक तो था ही, थिएटर का अनुभव भी था, तो मैं वहां चली गई। उसमें सलेक्ट होने के बाद तो बस जीवन की दिशा ही बदल गई। इस तरह 2009 में मेरा कॅरिअर शुरू हुआ। डिज्नी से मुझे अपना काम दिखाने का बहुत अच्छा प्लेटफॉर्ममिला। इसके कुछ सालों बाद मसान से मेरा फिल्मी कॅरिअर शुरू हुआ जिसने मुझे पहचान दी और लोगों का मेरे हुनर में भरोसा बना।

काम की सीमाओं को लगातार पुश करें
मैंने अपने जीवन में हमेशा ही सामान्य से अलग चुना जो कई बार मेरे आस-पास के लोगों को समझ नहीं आता था, लेकिन मुझे लगता था कि हमें हमेशा अपनी लिमिट्स को पुश करते रहना चाहिए और काम करते रहना चाहिए। इससे हम न सिर्फ बहुत कुछ सीखते हैं, बल्कि हमारी क्षमताएं भी बढ़ती चली जाती हैं। उदाहरण के तौर पर मुख्यधारा की फिल्में करने के अलावा जब मैं वेब सीरीज आदि करती हूं, तो मुझे कई तरह के प्रयोग करने के मौके मिलते हैं।
 

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