सफलता के लिए सौ नहीं, पूरी दाे सौ फीसदी मेहनत करें : मोनाली ठाकुर

प्लेबैक सिंगिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी हैं

FirstPerson। मेरा जन्म कोलकाता के एक म्यूजिकल परिवार में हुआ था। मेरे पिता शक्ति ठाकुर मशहूर बंगाली सिंगर थे, मां भी गाती थीं और मेरी बड़ी बहन मेहुली ठाकुर भी प्लेबैक सिंगर थीं। मैं समझती हूं कि संगीत के प्रति मेरे रुझान की यही वजह रही होगी। मैं अपने पिता को स्टेज पर परफॉर्म करते देखकर बहुत खुश होती थी और अपनी बहन की तरह गाना चाहती थी। इसी कारण आगे चलकर मैंने भी संगीत सीखा। मेरा पहला गाना तब रिकॉर्ड हुआ था जब मैं मात्र छह साल की थी। आठवीं क्लास में थी जब संगीत की मेरी ट्रेनिंग शुरू हुई। थोड़ी बड़ी हुई तो मैंने स्कूल और कॉलेज के सिंगिंग व डांस कॉम्पिटीशन में भाग लेना शुरू कर दिया। 

अंदर के कलाकार को मांझती हैं मुश्किलें
बिना रुके काम करते रहें, तो एक दिन मान व पहचान जरूर मिलते हैं। मैं इस इंडस्ट्री में पिछले दस सालों से हूं और सच कहूं, तो शुरुआत में मैं अपनी प्रस्तुतियों को लेकर बहुत सोचती थी जिसकी वजह से मुझे डर लगने लगता और मैं नर्वस हो जाती थी। धीरे-धीरे मैंने अपने स्टेज फियर को खत्म किया और सीखा कि कोई भी काम तभी अच्छा हो पाता है जब आप यह सोचना छोड़ दें कि कोई आपको देख रहा है। हालांकि स्टेज पर पूरी तरह ध्यानमग्न होकर गाना मैं अभी भी सीख रही हूं। मैं हमेशा से मानती हूं कि सफल होने के लिए अपना 100% नहीं, बल्कि 200% देना होता है। अक्सर जब मुझसे मेरे संघर्ष के बारे में पूछा जाता है, तो मैं डेंजेल वॉशिंगटन की कही गई एक बात दाेहरा देती हूं कि बारिश के लिए प्रार्थना करते हुए ध्यान रखना चाहिए कि उसके साथ मिट्टी भी आती है। इसी तरह यहां तक पहुंचने में जो भी परेशानियां सामने आईं, मैंने उनको उपजाऊ मिट्टी समझा है।

हुनर ही है जो काम को आगे ले जा सकता है 
कुछ सालों तक संगीत सीखने के बाद जब वर्ष 2005 में इंडियन आइडल का दूसरा सीजन आया, तो उसके ऑडिशन में सलेक्ट होने के बाद मैं मुम्बई शिफ्ट हो गई। इस तरह वहीं से प्लेबैक सिंगिंग में मेरे कॅरिअर की शुरुआत हुई। इंडियन आइडल शो कि वजह से मुझे कई ऑफर्स मिलने लगे। हालांकि अपने इस अनुभव से मुझे एक बहुत बड़ी सीख मिली जो मैं युवाओं से भी शेयर करना चाहूंगी कि टीवी पर आने और फेस वेल्यूबढ़ने की वजह से आपको काम तो मिल जाता है, लेकिन वह ज्यादा दिन नहीं चलता। ऐसे में सिर्फ और सिर्फ आपका हुनर ही है जो आपको आगे ले जा सकता है। मेरे काम भी वही आया जाे मेरे गुरू ने मुझे सिखाया। 
 

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