रिसोर्सेज की कमी का बहाना न बनाएं-रीमा दास

अपने कॅरिअर की शुरुआत मैंने एक्टिंग से की थी। आगे चलकर मेरी दिलचस्पी फिल्ममेकिंग की ओर हुई तो मैंने इसमें भी हाथ आजमाया।

FirstPerson। एक्टिंग और फिल्ममेकिंग से ऑस्कर नॉमिनेशन तक की अपनी छोटी सी यात्रा में मैंने बहुत कुछ सीखा है। अपनी फिल्मों की मेकिंग से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक बहुत-सी जिम्मेदारियां मैंने खुद ही संभाली। मेरे पास कोई टीम नहीं थी और इस बात से परेशान होने की जगह मैंने इस स्थिति का सामना करना तय किया। मैंने राइटिंग, डायरेक्शन, प्रोडक्शन, एडिटिंग, शूटिंग, से लेकर कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग तक कई काम खुद ही किए। इसकी एक वजह यह भी थी कि मेरे पास एक सीमित बजट था। अपने इस अनुभव से मैंने सीखा कि कई बार अभाव में हम एेसे कई काम कर लेते हैं जो अन्यथा नहीं कर पाते। 

काम को आॅथेंटिक बनाएंगे तो कामयाबी तय है
-
 मेरा ज्यादातर समय मुंबई में बीतता है लेकिन मैं अपने गांव से भी जुड़ी रहती हूं। मुझे वहां से बहुत ऊर्जा और कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। अब जब मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि विलेज रॉकस्टार बनाना वाकई बहुत ही मुश्किल था जिसमें पूरी टीम को कड़ी मेहनत करनी पड़ी और काफी धैर्य भी रखना पड़ा। चूंकि यह कहानी बच्चों से जुड़ी थी तो चीजों को नेचुरल और ऑथेंटिक बनाए रखने के लिए मुझे भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन इस तरह मेहनत करना अंत में सुखद ही लगता है। 

कई काम खुद सीखे और किए भी
- अपने कॅरिअर की शुरुआत मैंने एक्टिंग से की थी। आगे चलकर मेरी दिलचस्पी फिल्ममेकिंग की ओर हुई तो मैंने इसमें भी हाथ आजमाया। मुझे इस काम में काफी मजा आया इसीलिए मैंने आगे भी शॉर्ट फिल्म बनाना जारी रखा। मैंने फिल्ममेकिंग सीखी नहीं थी लेकिन फिल्मों को देख-देख कर ही फिल्म बनाना सीखा। एक बार जब इस दिशा में सोचने लगी तो फिर खूब सारा लिटरेचर पढ़ा और अलग-अलग तरह की फिल्मों को देखकर उनसे सीखने लगी। अपने आस-पास के माहौल से ही मुझे फिल्में बनाने के लिए आइडियाज मिलते रहे। विलेज रॉकस्टार का आइडिया भी कुछ इसी तरह आया। मैं छुट्टियां मनाने अपने गांव गई थी। वहां मैंने बच्चों को नकली इंस्ट्रूमेंट्स का एक बैंड बना कर खेलते देखा, तब मेरे दिमाग में यह फिल्म बनाने का खयाल आया। इससे मैंने सीखा कि हमें अपने दिमाग को खुला रखना चाहिए न जाने कब कौन सा विचार हमारे जीवन को दिशा दे दे। मेरी पहली फिल्माें के आइडियाज भी अचानक इसी तरह मिले थे। दरअसल मेरे एक साथी ने अपने पिता के लिए खरीदा बायनाकूलर दिखाया तो वहां से मुझे मैन विथ द बायनाकूलर शॉर्टफिल्म बनाने का विचार आया। इस फिल्म को मैंने अपने डीएसएलआर कैमरा से ही शूट किया। मैंने कभी साधनों की कमी के बारे में सोचा ही नहीं। 

Next News

जिंदगी को जीतना है तो कुछ अलग करें : वीर दास

जिस दिन आप करोड़पति हो जाएं अपने लिए 50 रूपए का चीजबर्गर खरीदें।

सक्सेस के लिए खुद को चैलेंज करते रहें- रसिका दुग्गल

काम के प्रति उत्साह ने ही मेरे लिए आगे के रास्ते खोले हैं।

Array ( )