25 की उम्र में मत मरने दीजिए अपने सपनों को : जीवेशु अहलुवालिया, कॉमेडियन

कामयाब कॉमेडियन जीवेशु अहलुवालिया के इन अनुभवों में छिपा है स्टूडेंट्स के लिए ढेर सारा मोटिवेशन

FIRST PERSON: जिम कैरी का एक कथन है और मैं भी इसमें विश्वास करता हूं कि जीवन हर व्यक्ति को एक बार अमीर और मशहूर होने का मौका देता है लेकिन आपको यह भी समझना होगा कि खुशी का इससे कोई लेना देना नहीं है। यकीन मानिए आप साधारण चीजों के साथ बहुत खुश रह सकते हैं। हममें से ज्यादातर तो 25 की उम्र में ही मर जाते हैं बस हमारा अंतिम संस्कार 75 की उम्र में किया जाता है। कहने का अर्थ है कि 25 की उम्र में ही उनके सपने दफन हो जाते हैं। अपने साथ यह मत होने दीजिए। आप अपने होने या न होने पर सवाल उठाइए, मैंने भी यही किया है। अगर आपकी जिंदगी में कोई ऐसा दिन आए जब आपके पास खोने के लिए कुछ न बचा हो तो निराश होने की जरूरत नहीं है। यह अपने आकलन का सही समय है कि आपको किन बातों से, किस काम से खुशी मिलती है। उसे खोजिए और उसको पाने के लिए काम कीजिए। याद रखें ऐसा नहीं है कि कोई जादू होगा और आपके जीवन से हरेक निराशा खत्म हो जाएगी। लेकिन आपकी जिंदगी के खूबसूरत पल यादों के रूप में उससे लड़ने में आपकी मदद करेंगे और आपका हौसला भी बढ़ाएंगे। 

कोई भी बैकअप प्लान खुशियों की गारंटी नहीं है 

अगर आप मध्यमवर्ग से हैं तो सबसे पहले आपके सपने मरते हैं क्योंकि हर आदमी आपको यह बता रहा होता है कि आपको अपनी जिंदगी किस तरह जीनी है। आप सबको सुनते हैं, मैंने भी यही किया। मैंने अपना पहला मकान खरीदा तब मैं सिर्फ 28 साल का था और दूसरा जब मैं 30 का हुआ। तीसरे मकान को खरीदते वक्त मेरी उम्र 32 साल थी। मेरे जीवन में एक दौर ऐसा आया जब मेरे पास 6 फ्लैट और 2 विला थे। लेकिन मैं कर क्या रहा था, मैं उन जगहों के लिए इंस्टॉलमेंट भर रहा था जहां कोई नहीं रहता था। जिनके न होने से भी मेरी जिंदगी में कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। हम खुश रहने के लिए ढेर सारा पैसा इकट्ठा करना चाहते हैं और उन खुशियों को बनाए रखने के लिए ढेरा सारा बैकअप चाहते हैं, लेकिन कोई भी बैकअप प्लान खुशियों की गारंटी नहीं है। 

सफलता बहुत सारे डर अपने साथ लेकर आती है 

मैं पढ़ने में अच्छा नहीं था, लेकिन मेहनती था इसलिए मुझे सफल होने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। पैसा कमाने और सफल होने के लिए मेहनत करना बुरी बात नहीं है, लेकिन आपको एक लाइन ड्रॉ करनी होगी। सफलता डर अपने साथ लेकर आती है कि अगर आप सफल होने के बाद असफल हो गए तो क्या होगा। फिर आप उस सफलता को बनाए रखने के लिए अपना पूरा जीवन खपा देते हैं। अपने साथ ऐसा मत करिए। मैं 35 साल में एक कंपनी का डायरेक्टर था लेकिन मेरे पास 35 खूबसूरत यादें नहीं थीं। इस तरह आप जिंदा होकर भी खुद को जिंदा महसूस नहीं कर पाते। जब मुझे इसका एहसास हुआ तो मैंने इस दौड़ से खुदको अलग करने का फैसला लिया। मुझे पता था कि लोगों को हंसाने में मुझे खुशी मिलती है, यही मेरा पैशन है और आज मैं इसी के लिए जी रहा हूं।

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