परीक्षाएं आयोजित कराने वाली एजेंसियों द्वारा वसूली जा रही फीस के तय किए जाएं मापदंड

भर्ती सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एजेंसियां वसूलती हैं अलग-अलग फीस,यदि परीक्षा निरस्त हो जाए तो फीस लौटाने का कोई नियम ही नही

एजुकेशन डेस्क। प्रदेश में हर साल होने वाली भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में 10 लाख से भी ज्यादा बेरोजगार युवा आवेदन करते हैं। इन परीक्षाओं के लिए अलग-अलग एजेंसियां अपने हिसाब से फीस वसूलती हैं। कारण साफ है, प्रदेश में फीस वसूली का कोई निर्धारित मापदंड ही नहीं है। कई मौकों पर तो समय पर रिजल्ट नहीं आता या फिर परीक्षाएं ही निरस्त हो जाती हैं, लेकिन परीक्षा निरस्त होने की सूरत में फीस वापसी का कोई नियम नहीं है। यदि कोई एजेंसी फीस वापस भी करती है तो प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि उम्मीदवार खुद को ठगा महसूस करते हैं। ऐसे में अब एजेंसियों द्वारा तय फीस को रेगुलेट करने की जरूरत महसूस हो रही है।

इधर, जानकार कह रहे हैं कि बेरोजगार युवाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फीस ही नहीं लेनी चाहिए। इस पर सरकार को नीतिगत फैसला लेना चाहिए। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट में भर्ती परीक्षाओं में ली जाने वाली फीस को लेकर एक जनहित याचिका दायर हुई है। याचिका में मांग की गई है कि उन अधिकारियों या विभागों पर कारवाई की जाए, जो नौकरियों का विज्ञापन करते हैं। मोटी फीस जमा कराते हैं, लेकिन सालों तक पद नहीं भरते हैं। मामले में चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस ब्रजेश सेठी की डबल बैंच ने दिल्ली सरकार को नोटिस भी जारी किया है।

एमपीपीएससी : 2014 व 2016 में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए आवेदन बुलाए गए थे, लेकिन भर्ती ही निरस्त कर दी गई। फीस वापस करने के लिए जून 2018 में नोटिस जारी किया। दिसंबर-2017 में फिर से विज्ञापन जारी हुआ। परीक्षा भी करा ली, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुईं। अनारक्षित वर्ग से 1200 व आरक्षित वर्ग से 600 रुपए फीस ली गई है।

{इसी वर्ष 15 फरवरी कोएमपीपीएससी ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए चिकित्सा अधिकारियों के बैकलॉग पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। फीस 500 रुपए तय की। परीक्षा ऑनलाइन होने पर फीस के अलावा 40 रुपए पोर्टल फीस ली गई। कहा गया कि परीक्षा निरस्त होने की सूरत में पोर्टल फीस वापस नहीं होगी।

पीईबी : मप्र एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (मेपआईटी) के विभिन्न संविदा पदों पर भर्ती परीक्षा-2018 के लिए पीईबी ने विज्ञापन जारी किया। परीक्षा 13-14 अक्टूबर को होनी थी, पर आवेदन जमा होने के बाद भर्ती निरस्त कर दी गई। विरोध जताने के बाद उम्मीदवारों द्वारा जमा फीस वापस करने का निर्णय लिया।

{जेल विभाग के अंतर्गत प्रहरी की सीधी भर्ती परीक्षा-2018 के लिए सामान्य वर्ग से 500 रुपए और आरक्षित वर्ग से 250 रुपए फीस ली गई है। कियोस्क के माध्यम से फॉर्म भरने के लिए 70 रुपए व इसके अलावा अतिरिक्त रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से लॉगइन कर फॉर्म भरने पर 40 रुपए देने होते हैं। विभागीय सीमित सीधी भर्ती पद के लिए 900 रुपए फीस ली जाती है। नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा के लिए भी इतन फीस ली गई।

विश्वविद्यालय : आरजीपीवी में जून 2018 में विज्ञापन जारी कर कॉन्ट्रेक्ट फैकल्टी भर्ती के लिए अनारक्षित वर्ग से 750 रुपए फीस ली गई, लेकिन अभी तक भर्ती नहीं हो सकी है। इसके अलावा रेगुलर फैकल्टी के लिए 3 से 4 बार आवेदन भरवाए गए, लेकिन भर्ती नहीं हो सकी। मप्र भोज मुक्त विवि ने 2016 में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए भर्ती निकाली, लेकिन कोर्ट में मामला जाने से प्रक्रिया लंबित है।

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