काम मिलने के बाद भी खत्म नहीं होता संघर्ष : विक्की कौशल

इस बॉलीवुड एक्टर को इंजीनियरिंग करने के बाद महसूस हुआ कि यह उनकी पसंद का फील्ड नहीं है

First Person। मुझे खुशी है कि मेरी पिछली कुछ फिल्मों में मेरे काम को ऑडियंस ने खूब सराहा है और आज लोग मुझे पहचानने लगे हैं। यहां तक की यात्रा में मेरा संघर्ष दूसरों की तुलना में कुछ हद तक कम था, लेकिन शुरुआत के दिनों का मेरा संघर्ष कुछ मुश्किल था। एक समय था जब मैं एक रोल के लिए फिल्म सेट्स के दरवाजों पर 100-200 लोगों की लाइन में घंटों खड़ा रहता था। कई-कई बार रिजेक्ट हो जाता था और फिर कई दिनों तक उदास रहता था। इसीलिए अब जब कई बार शूटिंग में समय लगता है और घंटों इंतजार करना होता है, तो मैं बहुत शिकायत नहीं करता, क्योंकि यह इंतजार काम मिलने के इंतजार से कहीं बेहतर होता है। दरअसल संघर्ष हमें व्यक्ति के तौर पर बेहतर बनाता है और हर चीज के महत्व को समझ पाते हैं। अपनी हर नई फिल्म को साइन करते हुए मैं गौरवान्वित महसूस करता हूं। काम करने से मिलने वाली संतुष्टि और खुशी मेरे लिए बहुत मायने रखती है। ऐसा शायद इसलिए भी होता है, क्योंकि काम मिलना आसान नहीं होता और ऐसा भी नहीं है कि एक मौका मिल जाने पर आपका संघर्ष पूरी तरह खत्म हो जाता है। ऐसा इसलिए कि एक तो इंडस्ट्री में टैलेंटेड लोगों की कमी नहीं है और दूसरा उनके बीच अपनी जगह बनाए रखने के लिए आपको अपने काम को लगातार सुधारते रहने का संघर्ष करना होता है। मुझे लगता है कि जब तक यह जारी रहेगा, आप दर्शकों की पसंद बने रहेंगे।

कभी सोचा नहीं था कि एक्टिंग करूंगा
मैं मुम्बई के ही मलाड एरिया में एक दस बाइ दस के चॉल में पैदा हुआ था। मेरे पिता स्टंटमैन थे। मेरा बचपन भी बाकी सभी सामान्य बच्चों की तरह पढ़ने, क्रिकेट खेलने और फिल्में देखने में बीता। स्टेज पर मैं हमेशा से सक्रिय था, फिर चाहे वह डांस हो, फैंसी ड्रेस कॉम्पिटीशन हो या फिर नाटक, लेकिन एक्टर बनने के बारे में नहीं सोचा था। न ही शूटिंग देखने या किसी हीरो से मिलने की कोई इच्छा थी। घर में भी फिल्मों का माहौल नहीं था और इसलिए कोई रुझान भी नहीं था। इसी के चलते इंडस्ट्री के बीच में रहते हुए भी मैं और मेरे परिवार के अन्य सदस्य उस तरह से बड़े नहीं हुए। 

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद बदला मन
इंजीनियरिंग की पढ़ाई में इंडस्ट्रियल विजिट के दौरान एक बार मैंने जब लोगों को कम्प्यूटर स्क्रीन के आगे बैठ कर काम करते हुए देखा, तो मुझे लगा कि मैं अपना सारा जीवन इस तरह कम्प्यूटर के आगे बैठ कर नहीं बिता सकता। उन्हीं दिनों मुझे पापा के साथ कई फिल्मों के सेट्स पर जाने का मौका मिला। तब वहां का माहौल देखकर मेरे अंदर असिसटेंट डायरेक्टर का काम सीखने की इच्छा पैदा हुई। वहां मैंने निश्चय किया कि इंजीनियरिंग के बाद मैं सबसे पहले असिस्टेंट डायरेक्टर ही बनूंगा। 2009 में इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद मैं इंटरव्यू देने पहुंच गया। काफी इंटरव्यूज के बाद मुझ अनुराग कश्यप के साथ फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में असिस्ट करने का काम मिल गया और इसके बाद तो धीरे-धीरे सब होता चला गया। काम मिलता गया और मैं पूरी शिद्दत से काम करता रहा। आज जो पहचान मिली है वह इसी मेहनत का नतीजा है, क्योंकि मेरा काम अपने टैलेंट को अपनी मेहनत से मांझते रहना है।
 

Next News

अपने पैशन के लिए नौकरी छोड़ी : वरुण चक्रवर्ती

सफलता में होती है सबकी भागीदारी

आप जो काम करते हैं उससे खुशी मिलना जरूरी है- सुशांत सिंह राजपूत

स्वभाव से इंट्रोवर्ट एक्टर सुशांत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर डांस शुरू किया, यहीं से उनके लिए एक्टिंग की राह खुली

Array ( )