दोबारा नहीं होगा क्लैट, छात्रों को दें कंपेन्सेंट्री मार्क्स: SC का आदेश

कोर्ट ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल स्टडीज को कंपन्सेट्री मार्क्स देने का बाद दोबारा मेरिट लिस्ट जारी करने के आदेश दिए है।

एजुकेशन डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने क्लैट एग्जाम में तकनीकी कारणों की वजह से एग्जाम देने में आई दिक्कतों का सामना करने वाले स्टूडेंट्स को कंपन्सेट्री मार्क्स देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल स्टडीज(NUALS) को  एलिजिबल स्टूडेंट्स को कंपन्सेट्री मार्क्स देने के बाद 16 जून तक दोबारा मेरिट लिस्ट जारी करने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट में उन स्टूडेंट्स की याचिका पर सुनवाई की जिन्होनें क्लैट एग्जाम में तकनीकी दिक्कतों का सामना करने पर कोर्ट में याचिका दायर की थी। लगभग 4000 स्टूडेंट्स ने याचिका दायर की जिसमें से सिर्फ 400 स्टूडेट्स को एलिजिबल पाया गया। बता दें कि नेशनल लॉ यूनिवर्सलिटी कोच्चि के द्वारा 13 मई को कंडकिट कराए गए क्लैट एग्जाम के दौरान कई स्टूडेंट्स को स्क्रीन ब्लैक होना, सिस्टम हैंग और क्रैश होना,पावर कट होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। 

 

पहली काउंसलिंग में नहीं किया जाएगा कोई हस्तक्षेप
- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले राउंड की काउंसलिंग पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
- जिन स्टूडेंट्स को तकनीकी खामियों का सामना करना पड़ा उनको कंपन्सेट्री मार्क्स मार्क्स मिलने के बाद दूसरी काउंसलिंग में मौका दिया जाएगा।

 

कमेटी ने क्लैट में आई शिकायतों की जांच की थी। 

- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कमेटी ने क्लैट में भाग लेने वाले 4690 कैंडिडेट्स की शिकायतों की जांच की थी। कमेटी ने पाया कि लॉगइन फेल्योर, मशीन का बदलना, माउस न चलना, सिस्टम हैंग होना, स्क्रीन का ब्लैंक होन, उत्तरों का गायब हो जाना जैसी समस्याएं प्रतिभागियों ने फेस कीं। 
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज (NUALS) कोच्चि ने दो सदस्यीय कमेटी बनाई है।
- इस कमेटी के प्रमुख केरल हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एमआर हरिहरन नायर हैं। उनके अलावा इसमें कोच्चि यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के एचओडी संतोष कुमार शामिल है।

 

हाईकोर्ट में सुनवाई पर पहले ही लग चुकी है रोक

- सुप्रीम कोर्ट ने क्लैट को लेकर विभिन्न हाईकोर्टों दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई से रोक पहले ही लगा दी थी। अभी इस मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही हो रही है। 
- इस मामले को लेकर छात्रों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।


प्रायवेट कंपनी की मदद से एग्जाम कराया

- 13 मई को ऑनलाइन हुए क्लैट के एग्जाम का प्रायवेट कंपनी सिफी टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की मदद से कंडक्ट कराया गया। इस एग्जाम से देश के विभिन्न लॉ यूनिवर्सिटीज में 5 साल के कोर्स के लिए एडमिशन दिया जाता है।

 

स्टूडेंट्स ने कोर्ट में लगाई थी दोबारा एग्जाम कराने की याचिका

- तकनीकी खामियों के कारण कई स्टूडेंट्स को एग्जाम बिगड़ गया जिससे नाराज होकर कई स्टूडेंट्स ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दोबारा एग्जाम कराने के मांग की थी।
- स्टूडेंट्स ने इसके पीछे तर्क दिया था कि एक या दो सवाल गलत होने पर स्टूडेंट्स की रैंकिंग हजारों प्वाइंट नीचे जा सकती है। स्टूडेंट्स का कहना था कि यह उनके संविधान में दिए गए अनुच्छेद 14 और 21 के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
- स्टूडेंट्स ने याचिका में देशभर के 200 एग्जाम्स सेंटर्स में आई समस्याओं का ब्योरा दिया। उन्होंने दावा किया कि एनएलयू कोच्चि के कुलपति ने खुद माना है कि 1.5% स्टूडेंट्स को एग्जाम के दौरान दिक्कतें आईं। 1.5% का मतलब 850 स्टूडेंट हैं। यह संख्या ही एग्जाम को दोबारा करवाने का ठोस आधार है।

 

क्या होता है क्लैट एग्जाम?

- क्लैट एक तरह का ऑल इंडिया कॉमन लॉ एंट्रेंस एग्जाम है, जिसे देशभर की 19 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) में से किसी एक यूनिवर्सिटी की तरफ से कंडक्ट कराया जाता है।
- इस एग्जाम के जरिए एलएलबी और एलएलएम कोर्सेस के लिए एडमिशन होता है। इस साल NUALS, कोचि की तरफ से इस एग्जाम को कंडक्ट कराया गया था।

Next News

क्लैट: जांच कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, कहा दोबारा एग्जाम कराना उचित नहीं

4690 कैंडिडेट्स की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी जांच कमेटी

इलाहबाद हाईकोर्ट / ग्रुप- सी और डी परीक्षा के एडमिट कार्ड 12 जनवरी को होंगे जारी

यह परीक्षा ग्रुप-सी, डी और ड्राइवर के 3,495 पदों पर भर्ती के लिए अयोजित हो रही है

Array ( )