मॉडर्न क्लास: 45 मिनट का पीरियड खेलने के लिए, खिलौनों से समझा रहे फिजिक्स

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने मौजूदा स्कूली सत्र से कई तरह के बदलाव करने सुझाव दिए है।

एजुकेशन डेस्क। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने मौजूदा स्कूली सत्र से कई तरह के बदलाव करने के सुझाव दिए थे। मकसद थाबच्चों के लिए पढ़ाई रोचक हो और सीखने का तरीका भी, खेल-कूद का भी भरपूर वक्त मिले। ऐसे में सिटी भास्कर ने जानने की कोशिश की कि अलग-अलग सुझावों के लिए शहर के स्कूलों ने क्या तैयारी की है और मौजूदा क्लासरूम कितना बदलने वाले हैं।

खेल का पीरियड जरूरी है, हर बच्चे को दो अलग-अलग गेम्स खेलने है- सेंट जेवियर्स स्कूल के प्रिंसिपल फादर वर्गीज ने बताया,स्कूल में अभी 6 दिनों के लिए स्पोर्ट्स की क्लास काशेड्यूल तो नहीं हो पाया है, लेकिन, हमने स्टूडेंट्स कोसप्ताह में तीन दिन स्पोर्ट्स की क्लास देने की शुरुआत कर दी है। साथ ही, कोशिश करते हैं कि एसेम्बली के समय में स्कूल के सभी बच्चों को रोजाना आधे घंटे की फिजिकल एक्सरसाइज और योग करवाया जाए, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत बन सकें। 

गेम्स के लिए स्कूल का समय 45 मिनट बढ़ाया- सेंट जोसफ कॉन्वेंट स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर रवदीप सिंह ने बताया- स्कूल में बच्चाें काे हर राेज खेल का एक पीरियड देने के लिए स्कूल के समय में बदलाव कर दिया गया है। अब स्कूल का समय 45 मिनट बढ़ा दिया गया है, ताकि एक जीराे पीरियड लगाया जा सके और हर बच्चा उस पीरियड में किसी न किसी फिजिकल एक्टिविटी का हिस्सा बने। रूटीन क्लासेस में स्पोर्ट्सस के पीरियड का शेड्यूल है, तो ठीक है, बाकी सभी बच्चे जीरो पीरियड में प्ले ग्राउंड में होते हैं।

हर दिन योग, डांस और स्विमिंग-
सागर पब्लिक स्कूल साकेत नगर की प्रिंसिपल पंकज शर्मा ने बताया बच्चों को रोज स्पोर्ट्स क्लास के साथ योग, डांस, स्विमिंग को भी जोड़ा गया है, ताकि उनकी फिजिकल एक्सरसाइज होती रहे और वे एक्टिव रहें।

पढ़ाने के लिए कलात्मक तरीके अपनाए-
केन्द्रीय विद्यालय-1 में साइंस की टीचर डाॅ. मीता चाैरसिया बताती हैं- आर्ट इंटीग्रेटेड एजुकेशन के लिए स्कूल में अब विषयों को एक्टिविटीज के माध्यम से पढ़ाने की शुरुआत की जा रही है। पहले भी कुछ विषयों में हमने यह शुरू किया था, जैसे लैंग्वेज सब्जेक्ट में शामिल कहानियों या नॉवल्स को हम रोल प्ले या स्किट के माध्यम से तैयार करते थे, अब हमारी काेशिश हाेती है कि ज्योग्राफी, जूलॉजी, फिजिक्स और मैथ्स जैसे टेक्निकल विषयों को भी आर्टिस्टिक ढंग से पढ़ाया जाए। फिजिक्स में राेशनी और परछाइयों काे समझाने के लिए खिलाैनों का सहारा लिया, वहीं मैथ्स काे पढ़ाने के लिए न्यूजपेपर से एेसी स्टिक्स तैयार कीं, जिनसे बच्चे मैथ्स के अलग-अलग शेप्स तैयार कर सकें। इससे त्रिभुज, चतुर्भुज और हेक्सागन जैसी आकृतियाें काे वेछूकर समझ सकेंगे। 

मैथ्स के 2 पेपर- सरल व स्टैंडर-

10वीं बोर्ड का मैथ्स का पेपर दो तरीके का होगा- एक आसान जिसे मैथ्स बेसिक कहा जाएगा और दूसरा मौजूदा जो मैथ्स स्टैंडर्ड कहलाएगा। सहोदय समूह के सेक्रेटरी फादर सोजन जोसफ कहते हैं, 10वीं में बच्चों को ऑप्शन दिया गया है कि वे मैथ्स का बेसिक या स्टैंडर्ड पेपर अपने लिए चुन सकते हैं। रुझान देखें तो अभी बेसिक और स्टैंडर्ड मैथ्स चुनने वाले बच्चों का अनुपात करीब 40:60 का है। सीबीएसई ने इसके लिए किसी भी तरह का नया करिकुलम जारी नहीं किया है, ऐसे में सभी स्टूडेंट्स को मैथ्स का एक जैसा सिलेबस ही पढ़ना है, सिर्फ परीक्षा के समय वे अपने लिए बेसिक या स्टैंडर्ड पेपर चुन सकेंगे। जिन स्कूलों में 12वीं में साइंस के ज्यादा सेक्शन नहीं हैं और बेसिक मैथ्स पढ़ने वाले 10-12 बच्चे ही हैं, वे क्लासेस को अलग नहीं कर पा रहे, कुछ स्कूलों ने बेसिक और स्टैंडर्ड मैथ्स के आधार पर स्टूडेंट्स के सेक्शन अलगअलग किए हैं। 

हब ऑफ लर्निंग -

सागर पब्लिक स्कूल साकेत नगर ने आसपास के एरिया के स्कूलों से मीटिंग की है और उनसे पूछा है कि वह किस तरह की मदद चाहते हैं, ताकि उस दिशा में सालभर को प्लान किया जा सके।अभी नहीं आए हैं पूरे दिशा-निर्देश कैंपियन स्कूल के प्रिंसिपल फादर एथनस लाकड़ा ने कहा, हब ऑफ लर्निंग को लेकर अभी सीबीएसई ने बहुत साफ इंफॉर्मेशन स्कूलों को नहीं भेजी है। ऐसे में यह लर्निंग हब्स काम कैसे करेंगे, किस तरह से बनेंगे.. यह सुनिश्चित नहीं किया गया है। संभव है कि यह हब ऑफ लर्निंग नई एजुकेशन पॉलिसी के लिए एक तैयारी को शुरू करने वाली एक्टिविटी है, जिसकी शुरुआत होनी है। अब 31 जुलाई तक नई एजुकेशन पॉलिसी लॉन्च होने के बाद ही शायद इससे जुड़े हुए इंस्ट्रक्शंस आएंगे।

Next News

बीएससी फॉरेस्ट्री,एमए कंजर्वेशन जैसे अन्य कोर्स में एडमिशन प्रक्रिया शुरू, जानें अन्य अप्शन

उम्मीदवार इन संस्थानों की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर कोर्स के लिए अप्लाय कर सकते हैं

RSOS 2019 / 10वीं ओपन का रिजल्ट जारी, 44% स्टूडेंट्स हुए पास

10वीं की परीक्षा मार्च से मई तक आयोजित की गई थी

Array ( )