CBSE: इंग्लिश में मार्क्स कम आने से साइंस-कॉमर्स का रिजल्ट रहा कम

इस बार ह्यूमैनिटीज के मुकाबले साइंस और कॉमर्स के स्टूडेंट्स को तैयारी का समय कम मिला इसलिए बिगड़ा रिजल्ट

एजुकेशन डेस्क, जयपुर। सीबीएसई 12वीं में टॉप-10 में इस बार अकेले ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम से 9 स्टूडेंट हैं। कॉमर्स और साइंस का रिजल्ट ह्यूमैनिटीज के मुकाबले इस बार कम रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण इंग्लिश में साइंस और कॉमर्स के स्टूडेंट्स की परफॉर्मेंस अच्छी नहीं होना है। इस बार साइंस और कॉमर्स के बड़े सब्जेक्ट के बीच प्रॉपर गैप नहीं होना भी एक कारण है। वहीं इकोनॉमिक्स का रिजल्ट बेहतर होने के पीछे ये है कि सीबीएसई ने रि-एग्जाम की कॉपी चैक करने के लिए सिर्फ 10 दिन दिए। जबकि सीबीएसई का रूल है कि किसी भी सब्जेक्ट की एग्जाम कॉपी 12 दिन में चैक करके देनी होती है। इस बार पेपर लीक होने के कारण रि-एग्जाम कॉपी को चैक करने के लिए 10 दिन मिले। इसलिए कॉपियों को चैक करते वक्त एग्जामिनर्स लिबरल हुए हैं। 

इस साल का रिजल्ट में 12% इजाफा हुआ 

- इस बार 12 परसेंट रिजल्ट का इजाफा हुआ है जबकि इकोनॉमिक्स में इतना बेहतर रिजल्ट कभी नहीं आया। 
- एक्सपर्ट तो ये भी मानते हैं कि पहली बार सीबीएसई ने एक ही सब्जेक्ट की कॉपी को दो हिस्सों में डिवाइड कर दो एग्जामिनर्स से चैक करवाई है। इसलिए मार्क्स पर बहुत असर हुआ है। 
- इससे पहले जो मार्क्स में वेरिएशन आता था वो इस बार कम हुआ है। क्योंकि एक ही कॉपी में स्टूडेंट्स को दो एग्जामिनर्स ने मार्क्स दिए हैं। 
- इससे दो अलग-अलग एग्जामिनर्स के दो अलग-अलग मार्क्स देने के तरीके से ओवरऑल रिजल्ट पर साफ असर दिखाई दे रहा है। 

इंग्लिश में 70 से 75 तक मार्क्स 

- एक्सपर्ट कहते हैं कि जिन स्टूडेंट्स के कैमिस्ट्री, बायो और मैथ्स में 95 से 97 तक मार्क्स आ रहे हैं उनके इंग्लिश में 70 से 75 तक मार्क्स आए हैं। ऐसे में ओवरऑल रिजल्ट पर इंग्लिश का असर दिखा। क्योंकि इंग्लिश पेपर के तुरंत बाद मेजर पेपर रख दिए गए। 

मां ने बुरे वक्त में दिया हौसला 

- साइसं के स्टूडेंट शाश्वत शर्मा ने 94.2 फीसदी अंक हासिल किया है। ये अपनी सफला का श्रेय मां राजकला शर्मा को देते हैं। वे कहते हैं कि मेरी मां एक सामान्य टीचर है लेकिन समय का प्रबंधन उन्होंने ही सिखाया। उनकी मां ने बुरे वक्त के बीच की शाश्वत को हौंसला टूटने नहीं दिया। अब मां की तमन्ना है में आईएएस के लि तत्पर बनूं। 

स्पोर्ट्स और स्टडी के बीच बैलेंस ने दिलाई सफलता 

- बोर्ड एग्जाम से पहले टूर्नामेंट में बेहतरीन परफॉर्मेंस का प्रेशर, उसके बाद एग्जाम में खुद को बेहतर साबित कर पाना मुश्किल सा हो जाता है। ये कहना है 94.8 परसेंट हासिल करने वाली सिद्दिता सिंह राठौड़ का। स्कूल की तरफ से जब कभी भी हैंडबॉल जैसे स्पोर्ट्स को रिप्रजेंट करती तो लोगों को लगता था कि मैं शायद स्टडी में अपना 100 परसेंट न दे पाऊं। अक्टूबर से मैंने अपनी स्टडी को फोकस करना शुरू किया और ये निश्चित कर लिया कि खेल की तरह मुझे स्टडी में भी आगे रहना है। 

गेम और स्टडी में बेहतर तालमेल से मिला परिणाम 

मेयो कॉलेज अजमेर का स्टूडेंट समृद्ध रेला ने काॅमर्स में 96.8 परसेंट हासिल किए। वे नेशनल फुटबॉल प्लेयर भी हैं। स्टडी और गेम्स में तालमेल पर वे बोले मेरे लिए दोनों ही जरूरी है। यही वजह है कि मैं दोनों में बेस्ट परफॉर्म करने के लिए पूरी मेहनत करता हूं। गेम्स के लिए रोज दो से ढाई घंटे फुटबॉल खेलता था। आईपीएससी टूर्नामेंट में टीम गोल्ड मेडल जीता और मेयो फुटबॉल टूर्नामेंट में भी हमारी टीम चैंपियन रह चुकी है। 

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