CBSE: 12वीं में 75% से कम होने पर नहीं मिलेगी IIT-NIT सीट

एनआईटी, आईआईटी, आईआईआईटी और सरकारी अनुदान प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए 12वीं में 75% मार्क्स होना अनिवार्य है।

एजुकेशन डेस्क, इंदौर। पेपर लीक के बाद बढ़ी सीबीएसई स्टूडेंट्स की घबराहट अंतत: शनिवार सुबह खत्म हो गई। घबराहट इसलिए थी क्योंकि इकोनॉमिक्स की एग्ज़ाम वापस होना थी। हुआ भी लेकिन पेपर ईज़ी होने के कारण स्टूडेंट्स ने पहले से ज्यादा मार्क्स हासिल किए। रिजल्ट आने पर कई बच्चों के चेहरे पर खुशी है तो कई बच्चे उदास है। उदास इसलिए क्योंकि वह 75% मार्क्स हासिल नहीं कर सकें। एमआईटी और आईआईटी व सरकारी अनुदान प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए 75% मार्क्स होना जरूरी है। ऐसे में कई स्टूडेंट्स जिन्होंने जेईई मेन और एडवांस्ड क्लियर कर लिया था वह एडमिशन नहीं ले सकेंगे। 

आईआईटी और एनआईटी से दूर होंगे कई स्टूडेंट्स 

- रिज़ल्ट ने कई बच्चों के चेहरों पर खुशी बिखेरी है तो कई उदास भी हुए हैं। इसलिए नहीं कि वे पास नहीं हो पाए बल्कि इसलिए कि वे 75 फीसदी अंक हासिल नहीं कर सके। 
- भूपेंद्र भावसार के अनुसार जेईई मेन और एडवांस के ज़रिए एनआईटी, आईआईटी, आईआईआईटी और सरकारी अनुदान प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स को बोर्ड एग्ज़ाम में 75 फीसदी मार्क्स लाना ज़रूरी होता है।
-  इस रिज़ल्ट में ऐसे कई बच्चे हैं जिन्होंने जेईई मेन और एडवांस में तो बेहतर अंक पाए लेकिन बोर्ड में एग्रीगेट 75 परसेंट मार्क्स नहीं पा सके। वे अब इन कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पाएंगे। उन्हें स्टेट के इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेना होगा। 

यूं खास रहा रिजल्ट

- रिज़ल्ट की खास बात यह भी रही कि चारों ही सब्जेक्ट में टॉपर लड़कियां रही हैं और उन्होंने पिछले रिज़ल्ट से बेहतर मार्क्स हासिल किए हैं। 
- पीसीएम में शहर की स्तुति मित्त्ल ने सर्वाधिक 97.8 मार्क्स स्कोर किए। 
- पिछले साल इसी सब्जेक्ट में अनन्य शर्मा ने 97.2 मार्क्स पाए थे। 
- ह्यूमेनिटीज़ में श्रेयांशी बाजपेयी ने 97.8 और कॉमर्स में स्नेहा अग्रहरि ने 97.4 मार्क्स हासिल किए। 

कोई कोचिंग नहीं, सिर्फ सेल्फ स्टडी की - स्तुति मित्तल, पीसीएम 97.8% 

- इतने मार्क्स इसलिए मिले क्योंकि मैंने सिर्फ खुद पर भरोसा किया। कोचिंग पर समय नहीं बिगाड़ा। इंजीनियरिंग करनी ही नहीं थी। फॉरेन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना था जो 11वीं में हो गया था। क्लास में मेरा पार्टिसिपेशन और कन्संट्रेशन ज्यादा रहता था। आधी तैयारी वहीं हो जाती थी। 
- स्कूल की पढ़ाई को घर पर रिवाइज़ करती थी। डाउट और प्रॉब्लम सॉल्व करने में स्कूल टीचर्स मदद करते थे। ज्यादा से ज्यादा किताबों से रेफरेंस लेती थी। रिज़निंग क्वेश्चन्स भी खूब किए। आंसर को डाइग्राम और एग्ज़ाम्पल्स से समझाए। पैराग्राफ की जगह पॉइंटर्स बनाए। 
- मैं अपनी तैयारी में कभी भी ओवर कॉन्फिडेंट नहीं हुई। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में बिहेवियर इकोनॉमिक्स में यूजी करूंगी। मुझे अमेरिकन कॉलेज टेस्ट, सेट सब्जेक्ट टेस्ट और टोफेल क्लियर करना पड़ी। 11वीं में ही ये परीक्षाएं मैंने दी थीं। एसीटी में 36 में से 35, सेट में तीनों सब्जेक्ट में 800 में से 800 और टॉफेल में 120 मार्क्स मिले थे। मैथ्स और इकोनॉमिक्स में 100 में से 100, इंग्लिश में 97, फिज़िक्स में 95 और केमिस्ट्री में 97 मार्क्स मिले हैं। 


टॉप करने की खुशी लेकिन इकोनॉमिक्स की री-एग्ज़ाम का अफ़सोस भी है - श्रेयांशी बाजपेई, ह्यूमेनिटीज़, 97.8% 

- किसी भी एग्ज़ाम में 97.8मार्क्स लाना आसान नहीं होता। मैंने भी इसके लिए बहुत मेहनत की है। सबसे मुश्किल काम था डिस्ट्रेक्शन्स को दूर करना। 
- सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दे सकूं इसलिए एग्ज़ाम के चार महीने पहले ही मैंने सभी सोशल मीडिया एप्लीकेशन्स अनस्टॉल कर दिए थे। 
- मुझे नॉवेल्स पढ़ना भी पसंद है लेकिन एग्ज़ाम पूरी होने तक मैंने एक भी बुक ना पढ़ने का फैसला किया था। 
- स्कूल के अलावा में सेट की प्रेपरेशन भी कर रही थी। स्कूल और कोचिंग के बाद मैं दो से तीन घंटा रोज पढ़ने की कोशिश करती थी। 
- इकोनॉमिक्स की वापस हुई एग्ज़ाम से शायद मुझे थोड़े मार्क्स का नुकसान हुआ है। 


चैप्टरवाइज़ टेस्ट पेपर सॉल्व करती थी - स्नेहा अग्रहरि, कॉमर्स 97.4% 
- मेरा मानना है कि घंटों पढ़ाई करने से दिमाग में कंजेशन हो जाता है इसलिए मैं ज्यादा लंबी सीटिंग नहीं देती थी। 
- रेग्यूलर 2 और एग्ज़ाम टाइम में मैक्सिमम 4 घंटे पढ़ती थी। थोड़ा पढ़ती थी लेकिन पूरे कंसन्ट्रेशन के साथ अच्छे से पढ़ती थी। 
- मुझे दोबारा रिविजन करने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। इसके साथ ही मैंने चैप्टरवाइस, सब्जेक्टवाइस बहुत सारे टेस्ट पेपर्स भी सोल्वे किये। 
- कुछ पेपर्स नेट से डाउनलोड करती थी। पूरे साल अलग-अलग पेपर्स सॉल्व किए। 
- कुछ टीचर्स ने सुझाए थे और कुछ वेबसाइट्स से लिए थे। टेस्ट पेपर्स सॉल्व करने का फायदा ये होता है कि पूरे सिलेबस का रिविज़न भी हो जाता है। 


हर पैराग्राफ से जितने हो सकें उतने सवाल निकाले और उन्हें सॉल्व किए - ज्योतिका प्रीति, पीसीबी 96% 
- इस एग्ज़ाम में नेवर बिफोर परफॉर्मेंस देना मेरे लिए ज़रूरी था। मेरे पापा डीपीएस के प्रिंसिपल थे। उस हादसे के बाद का पूरा घटनाक्रम ही सबसे बड़ी चुनौती रही। 
- 96 परसेंटेज इसलिए ला पाई क्योंकि मेरा पढ़ने का तरीका शायद अलग था। मैं हर पैराग्राफ से जितने हो सके उतने क्वेश्चंस निकालती थी। कभी कभी गाइड्स की भी मदद लेती थी। 
- गाइड में एनसीआरटी की अपेक्षा थोड़ा डिटेल में बताया जाता है। इसलिए उसमें ज़्यादा क्वेश्चंस निकलते हैं और साथ ही उसमें पहले से भी बहुत सारी एक्सरसाइज दी होती हैं। उन्हें भी सॉल्व करती थी। 
- कठिनाइयों को चुनौती की तरह लिया और ठान लिया कि इन चुनौतियों को पार कर अच्छे मार्क्स लाऊंगी। 

टॉप 10 पोजीशंस पर शहर के स्टूडेंट्स 

स्तुति मित्तल

97.8%  पीसीएम     

देहली पब्लिक स्कूल

श्रेयांशी वाजपेयी     

97.8%      ह्यूमेनिटीज     

क्वीन्स कॉलेज

ख्याति व्यास

97.6%      ह्यूमेनिटीज     

शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल 

स्नेहा अग्रहरि

97.4% कॉमर्स     

श्री सत्यसांई विद्या विहार 

सृष्टि अविनाश

97.4%      ह्यूमेनिटीज    

देहली पब्लिक स्कूल

ईशान जैन 

97.3%      ह्यूमेनिटीज     

डेली कॉलेज 

अदिति जुआल

97.2%  पीसीएम     

द एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल

शिखा जैन

97.2%  कॉमर्स     

सेंट अर्नाल्ड स्कूल, लालाराम नगर

सहज खंडेलवाल

97%  पीसीएम     

द एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल 

रित्विका नागर

97%  ह्यूमेनिटीज     

द शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल 

दीक्षा चौरसिया

97%      ह्यूमेनिटीज     

देहली पब्लिक स्कूल 

सृष्टि गुप्ता

97%      कॉमर्स     

सत्य साईं स्कूल 

परम चड्‌ढा

96.8%      कॉमर्स     

देहली पब्लिक स्कूल 

रश्मीत मुछाल

 96.6 % साइंस     

द शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल 

आस्था दांगी

96.4% कॉमर्स     

देहली पब्लिक स्कूल 

सृष्टि पाटिल

96.2%  साइंस     

द शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल 

खुशी बरनवाल

96.2%  कॉमर्स     

क्वीन्स कॉलेज

इरम खान 

96.2%  कॉमर्स     

क्वीन्स कॉलेज 

निकित पारेख

96.2% साइंस     

द शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल 

आशी अग्रवाल

96.2%      कॉमर्स     

इंदौर पब्लिक स्कूल 

दीपिका भाटिया

96.2%      कॉमर्स     

सिका स्कूल

हर्षिता जैन 

96.2%      कॉसर्म     

सेंट रेफियल स्कूल 

गीतिका भाटिया

96.2% 

कॉमर्स     

सिका स्कूल 

 

एस्केलेशन खत्म होने के बाद भी बेहतर आया रिज़ल्ट - मोहित यादव, प्रिंसिपल, एनी बिसेंट स्कूल

- सीबीएसई का यह रिज़ल्ट एक और मायने में बेहतर था क्योंकि बोर्ड की एस्केलेशन पॉलिसी खत्म होने के बाद यह पहली एग्ज़ाम थी। 
- इससे पहले बोर्ड अपने एक फिक्स फॉर्मूला के अनुसार बच्चों के मार्क्स बढ़ाती थी। 
- इस बार की परीक्षाओं से ये एस्केलेशन पॉलिसी खत्म की गई है। 
- रिज़ल्ट्स पर गौर करें तो इस बार 90 फीसदी अंक लाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 
- इसके अलावा 100 में से 100 यानि परफेक्ट स्कोर लाने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी बढ़ी है। 

सीबीएसई 2018 का रिजल्ट चेक करने के लिए यहां क्लिक करें

 

 

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