CBSE / 6-8वीं तक कला अनिवार्य, पाक कला भी पढ़ाना होगा

हफ्ते में कला की दो कक्षाएं लगाना जरूरी किया, लड़के भी लें बराबरी से हिस्सा

एजुकेशन डेस्क। सीबीएसई ने पिछले दिनों एक अधिसूचना जारी करके कहा था कि बच्चों को कलात्मक तरीके से (आर्ट इंटीग्रेटेड) शिक्षा दी जाए तो वे बेहतर तरीके से सीखेंगे। अब सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि कलात्मक तरीके से पढ़ाने को ही कला शिक्षा न मान लिया जाए। साथ ही कहा हैकि कला विषय के तहत 6वीं से 8वीं के विद्यार्थियों को चित्रकला, नृत्य-संगीत ही नहीं बल्कि अनिवार्य रूप से पाक कला भी सिखाएं।

सर्कुलर में कहा गया हैकि सभी स्कूलों को सप्ताह में कम से कम दो कक्षाएं कला की लगानी होंगी। बोर्ड ने सुझाव भी दिया हैकि कला के 4 मुख्य क्षेत्रों- संगीत, नृत्य, दृश्य माध्यम और नाटक के अलावा बच्चों को पाक कला से भी रूबरू करवाएं। इससे बच्चेविभिन्न विषयों के बीच बहु-आयामी तालमेल स्थापित कर पाएंगे और पौष्टिक आहार के महत्व को समझेंगे।

साथ ही, बच्चे भारत में पैदा होने वाली फसलों और मसालों के बारे में प्रयोग करके जान पाएंगे। इससे बच्चे यह भी सीख पाएंगे कि कैसे बीजों में से तेल निकाला जाता है, भारत में कृषि के बेहतर उदाहरण कौन से हैं। बच्चे जान पाएंगे कि किस राज्य में किस तरह के पारंपरिक व्यंजन पकाए और परोसे जाते हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए स्कूल कुछ कुकिंग क्लास भी आयोजित कर सकते हैं, जिसमें लड़के और लड़कियां बराबर मात्रा में हिस्सा लें। 

सेंट जोसफ को-एड स्कूल की वसुंधरा शर्मा ने बताया, पाक कला में बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए सालाना आर्ट एंड साइंस प्रदर्शनी में ऐसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, जिसमें बच्चे फ्लेमलेस कुकिंग और सलाद प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। सीबीएसई पाक कला की नियमित कक्षा चाहता है तो इसके लिए भी हम तैयार हैं।

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