महिलाओं को रात में गिरफ्तार नहीं कर सकते कितने भी समय बाद कर सकती हैं शिकायत

मानसिक-शारीरिक हिंसा, यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना ज़रूरी है। आइए, जानते हैं इनके बारे में-

एजुकेशन डेस्क। कोई भी महिला पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन जाने से इनकार कर सकती हैं। अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 160 के तहत महिलाओं को पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जा सकता। महिला कांस्टेबल या महिला के परिवार के सदस्य की उपस्थिति में घर पर ही पूछताछ की जा सकती है।

जानिए महिलाओं के ऐसे अधिकार
रात में गिरफ्तार नहीं कर सकते

- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी भी महिला को सूरज ढलने के बाद और सूर्यास्त से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। कई महिलाओं को इस अधिकार की जानकारी नहीं होगी कि महिला सिपाही भी रात में गिरफ्तार नहीं कर सकतीं। अपराध गंभीर है तब भी पुलिस को लिखित में मजिस्ट्रेट को बताना होगा कि आखिर क्यों रात में गिरफ्तार करना ज़रूरी है।

गरिमा और शालीनता 
- अगर आरोपी महिला है तो, उसके साथ उसकी गरिमा और शालीनता का ध्यान रखना अनिवार्य है। उस महिला पर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।


महिला से अपराध की स्थिति में ये हैं अधिकार

कार्यस्थल पर उत्पीड़न 
- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवाने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी सरकारी या गैरसरकारी संस्थाओं में एक कमेटी होनी चाहिए। इसकी प्रमुख महिला होनी चाहिए। कमेटी में 50 फीसदी महिलाएं होनी जरूरी है। 

जीरो एफआईआर 
- पुलिस पीड़िता को यह कहकर वापस नहीं कर सकती है कि मामला उसकी सीमा के बाहर का है। थाने को जीरो पर एफआईआर दर्ज करनी होगी। बाद में मामला संबंधित थाने को भेजा जाएगा। 

प्राइवेसी 
- पुलिस महिला को सभी के सामने बयान देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। दुष्कर्म पीड़ित मजिस्ट्रेट को अकेले में बयान दे सकती है। 

‘मी टू अभियान’ में सामने आ रहे हैं पुराने मामल
- हाल ही में ‘मी टू अभियान’ से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। इनमें कई बहुत पुराने हैं। इसमें देरी पर कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं। लेकिन कानून में महिला को अपने साथ हुए अपराध की शिकायत किसी भी वक्त करने का अधिकार दिया है। वे चाहें तो किसी भी समय शिकायत दर्ज करा सकती हैं। पुलिस यह कहकर नहीं लौटा सकती कि शिकायत काफी देर से की जा रही है।

ये अधिकार भी हैं हासिल

घरेलू हिंसा 
- ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा पत्नी, महिला लिव इन पार्टनर या घर में किसी भी महिला से की गई हिंसा से सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसमें पीड़ित या उसकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है। हाल ही में दहेज प्रताड़ना कानून की धारा 498-ए में संशोधन करते हुए जांच कमेटी की भूमिका खत्म कर दी गई है। अब पुलिस अपने विवेकानुसार आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर सकती है।

मातृत्व लाभ 
- प्रसव के 12 हफ्ते तक कामकाजी महिला के वेतन में कटौती नहीं कर सकते। इसके बाद वो फिर काम शुरू कर सकती है।

कन्या भ्रूण हत्या
हर नागरिक का ये कर्तव्य है कि वो महिला को मूल अधिकार- ‘जीने के अधिकार’ का अनुभव करने दें। गर्भाधान और प्रसव पूर्व पहचान की तकनीक (लिंग चयन पर रोक) अधिनियम (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या के
खिलाफ अधिकार देता है। 

संपत्ति
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पुश्तैनी संपत्ति पर महिला का भी बराबर हक है। 

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