नई व्यवस्था / 20 क्रेडिट अंक लाकर स्पेशलाइजेशन के साथ कर सकेंगे बीटेक ऑनर्स

छात्रों के लिए यह सुविधा भी... ऑनलाइन कोर्स अपने संसाधन से भी कर सकते हैं

एजुकेशन डेस्क गिरीश उपाध्याय, भोपाल राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) इंजीनियर काॅलेजों से बीटेक कर रहे स्डटूेंट्स के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत स्डटूेंट्स के पास यह मौका होगा कि वे अपनी क्षमताओं के बूते पर बीटेक की डिग्री को बीटेक ऑनर्स में कंवर्ट कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अंतिम चार सेमेस्टर में 20 क्डिट हा रे सिल करने होंगे। अभी बीटेक की डिग्री करने के लिए 170 क्डिट अंक रे प्राप्त करने होते हैं, लेकिन बीटेक ऑनर्स के लिए 190 क्डिट रे अंक हासिल करने होंगे। इसके अलावा स्डटूेंट्स मानव ससं ाधन विकास मंत्रालय के स्वयं पाेर्टल या एनपीटीईएल से बीई के ऑनलाइन कोर्स भी कर सकते हैं।

स्डटूेंट्स चाहें तो यूनिवर्सिटी उन्हें अन्य ब्रांच में भी माइनर स्पेशलाइजेशन करने का अवसर देगी, ताकि स्डटूेंट्स को मल्टी डिसीप्लीनरी कोर्स का भी नॉलेज मिल सके। इस कवायद का परिणाम यह होगा कि मल्टीनेशनल कंपनियों को न केवल स्किल्ड टैंलेंट मिल सकेगा, बल्कि युवाओं के सामने रोजगार के अवसर भी बढ़ जाएंगे। एकेडमिक काउंसिल ने भी इस व्यवस्था को हरी झंडी दिखा दी है। यह व्यवस्था आरजीपीवी में इसी सत्र से लागू की जा रही है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था सिर्फ उसी कॉलेज में अनिवार्य होगी, जहां पर्याप्त ससं ाधन मौजूद होंगे। वहीं स्डटूेंट्स ऑनलाइन कोर्स अपने ससं ाधन से भी कर सकता है।


यदि मैकेनिकल का छात्र कंप्यूटर साइंस भी पढ़ना चाहे तो उसे सब्जेक्ट के पूल में से कोई 5 विषय चुनने होंगे

अतिरिक्त विषयों की पढ़ाई करने का मिलेगा समय
आरजीपीवी यह व्यवस्था बीटेक के पांचवें सेमेस्टर से लागू कर रहा है। छात्र पांचवें, छठवें, सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई करने के साथ इसी दौरान 20 क्डिट रे प्राप्त कर सकता है। यह समय इसलिए चुना गया है, क्योंकि इन सेमेस्टर्स में विषयों की संख्या शुरुआती दो वर्ष के 4 सेमेस्टर की अपेक्षा कम होती है। इस दौरान छात्र को भी अतिरिक्त विषयों की पढ़ाई करने के लिए समय मिले सकेगा। साथ ही यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को भी टाइम टेबल बनाने में परेशानी नहीं होगी। 

छात्रों को होगा फायदा
योजना को तैयार कराने में मुख्य भूमिका निभा रहे और आरजीपीवी के ऑनलाइन कोर्स-को-आर्डिनेटर डॉ. मोहन सेन का कहना है कि इससे छात्रों को लाभ मिलेगा। वह आसानी से 20 क्डिट रे प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए स्डटूेंट्स को अतिरिक्त समय देना होगा। स्डटूेंट्स ऑनलाइन कोर्स कर उसके सर्फिटि केट विवि में जमा करते हैं ताे उन्हें बीटेक ऑनर्स की डिग्री दे दी जाएगी। यदि माइनर स्पेशलाइजेशन करना है तो नियमित कक्षाएं व यूनिवर्सिटी की परीक्षा में शामिल होना होगा। वर्तमान में मल्टीनेशनल कंपनियों को एेसे टैलेंट की जरूरत है, जिनके पास मल्टी स्पेशलाइजेशन हो।

सुपरविजन में करनी होगी पढ़ाई
यदि किसी स्डटूेंट को मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन मिलता है और वह अपनी पंसद के अनुरूप कंप्यूटर साइंस में माइनर स्पेशलाइजेशन करना चाहता है तो उसे कॉलेज प्रबंधन द्वारा बनाए गए विषयों के पूल में से 5 विषय चुनने होंगे। इसकी पढ़ाई उसे को-आर्डिनेटर के सुपरविजन के साथ ही विषयों की नियमित क्लास अटेंड करनी होगी। परीक्षा आरजीपीवी लेगा।

कम रैंक वाले छात्रों को भी मौका
विवि के इस करिकुलम के लागू होने से उन छात्रों को भी लाभ मिलेगा, जिन्हें इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पसंदीदा ब्रांच सिर्फ इसलिए नहीं मिलती, क्योंकि उनकी जेईई मेन में रैंक कम होती है। ऐसे में वह अपने पसंदीदा ब्रांच से जुड़े कोर्स ऑनलाइन कर सकेगा या फिर कॉलेज में रहकर विभाग स्तर पर अन्य किसी ब्रांच में माइनर स्पेशलाइजेशन करने का मौका मिल सकेगा। 
 

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