आलोचनाओं के लिए तैयार रहें, प्रदर्शन से दें जवाब : पूनम यादव

यह भारतीय लेग स्पिनर हाल ही आईसीसी की वुमन्स टी-20 रैंकिंग में दूसरी रेटिंग प्राप्त कर चर्चा में है

FirstPerson। मैं मूल रूप से आगरा की रहने वाली हूं। क्रिकेट में मेरी रुचि बचपन से ही थी और मैं कबड्डी, खो-खो जैसे लगभग सभी गेम्स में सक्रिय रूप से भाग लेती थी। मैं क्रिकेट अक्सर लड़कों के साथ खेला करती थी। चूंकि समाज आज तक भी यह समझता है कि क्रिकेट लड़कों का खेल है जिससे मुझे कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा। मुझे यह कई बार सुनने को मिला कि क्रिकेट लड़कियों का खेल नहीं है, इसमें अपना जीवन खराब मत करो। मैं उस समय चुप रही, क्योंकि मैं उन्हें अपने प्रदर्शन से जवाब देना चाहती थी।

मेरे पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं, इस वजह से घर में शुरू से ही अनुशासन बना रहता था जिसका मुझे फायदा भी मिला। स्टेडियम जॉइन कर लेने के बाद मेरे पिता ने मेरे खेल का देखा और उसके बाद उन्होंने मेरा जबरदस्त सपोर्ट किया। आज मैं यहां तक पहुंची हूं, तो इसमें सबसे अधिक यदि किसी का योगदान है, तो वह मेरे पिता का ही है। हालांकि मेरे भाई, फैमिली, फ्रैंड्स, मेरे साथ प्रैक्टिस करने वाले साथियों और मुझे सिखाने वाले 

आगे बढ़ने के लिए जोखिम तो उठाने ही पड़ेंग
मेरे पिता ने मुझसे पूछा कि पूनम, तुम जीवन में क्या करना चाहती हो, तो मैंने उन्हें कहा कि मैं सिर्फ और सिर्फ खेलना चाहती हूं। उनके पढ़ाई के बारे में पूछने पर मैंने कहा कि ये जोखिम तो मुझे उठाना ही पड़ेगा, क्योंकि पढ़ाई में भी मैं सौ प्रतिशत मार्क्स लाने का दावा नहीं कर सकती। इसके बाद उन्होंने मुझे खेल और पढ़ाई, दोनों में साथ भागीदारी निभाने के लिए अनुमति दी। चूंकि मेरे लिए खेल के साथ पढ़ाई करना बहुत कठिन था, लेकिन फिर भी मुझे जो मौका मिला था, मैं उसे गंवाना नहीं चाहती थी। स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के दौरान बहुत बार मेरे स्कूल की बस निकल जाती थी। तब मैं पैदल ही स्कूल जाया करती थी।

सपने पूरे करने के लिए करें मेहनत
मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना था कि मुझे क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के ग्राउंड पर खेलने का मौका मिले और वह अवसर वर्ल्डकप प्रतियोगिता के दौरान आया। इससे यह तय होता है कि आप जो सपने देखते हैं, उन्हें पूरा करने के लिए कितना काम करते हैं और उसे कितनी लगन से करते हैं। मैं बताना चाहूंगी कि हर मैच में दबाव होता है, लेकिन अपनी सबसे अच्छी प्रस्तुति देना ही मैं अपने लिए तय करती हूं।

प्रैक्टिस तय करती है आपकी परफॉर्मेंस कितनी बेहतर होगी
मुझे उत्तर प्रदेश स्टेट टीम में खेलने का मौका बड़ी मुश्किल से मिला, लेकिन वहां से मेरा सलेक्शन नहीं हुआ। मैं निराश जरूर हुई, लेकिन मैंने प्रयास करना नहीं छोड़ा। एक बार मैंने निराश होकर क्रिकेट छोड़ने के बारे में सोचा था, लेकिन मेरे पिता ने तब मेरा उत्साहवर्धन किया और कहा कि सच्ची मेहनत से मुकाम पाना संभव है। तीन साल अंडर -19 खेलने के बाद मैंने तीन साल सीनियर टीम में पार्टिसिपेट किया। यहां से मुझे रेलवे के लिए खेलने का मौका मिला। रेलवे में जॉब के दौरान मेरे स्टाफ ने बहुत सपोर्ट किया और मुझे खेलने की सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई। मैं कहना चाहूंगी कि अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस देने के लिए प्रैक्टिस करना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
 

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