डेडिकेटेड लर्नर बनें, जीत आपकी होगी : पृथ्वी शॉ

पहले ही टेस्ट मैच में शतक लगाकर चर्चा का केन्द्र बना यह युवा क्रिकेटर

First Person। नवम्बर 2013 में 14 साल की उम्र में हैरिस शील्ड ट्रॉफी में रिजवी स्प्रिंग स्कूल के लिए 330 बॉल पर रिकॉर्ड तोड़ 546 रन बनाने के बाद से मेरी लाइफ एक रोलर कोस्टर राइड रही है। यह सब बहुत आसान नहीं था। इसके लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी, जैसे कि सभी को करनी पड़ती है। बहुत ही कम उम्र में मेरी मां का देहांत हो गया था। मेरे पिता ने ही मेरा पालन पोषण किया। मेरी सफलता का सारा श्रेय उन्हीं को जाता है।

जब मैं बहुत छोटा था, मेरे पिता ने मुझे एक प्लास्टिक का बैट और बॉल लाकर दिया था। मैं सारा दिन उससे खेलता रहता था। थोड़ा बड़ा हुआ तो मेरे पिता ने मेरे इस हुनर को पहचाना। दरअसल वे खुद एक क्रिकेटर बनना चाहते थे। इसलिए जब उन्होंने मुझमें खेल के प्रति पैशन देखा तो उन्होंने मुझे खूब प्रोत्साहित किया। कई तरह की आर्थिक समस्याओं के बावजूद मुझे खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। 

कड़ी मेहनत में पिता ने पूरा सहयोग दिया
- मुझे याद है कि हमने कई मुश्किलों का सामना मिल कर किया। उस समय हम मुम्बई के विरार में रहते थे। हर दिन सुबह साढ़े चार बजे उठ जाते थे और 6 बजे की लोकल ट्रेन पकड़ कर स्कूल बैग और किट बैग लेकर बांद्रा जाते थे। वहां एमआईजी ग्राउंड में सुबह का ट्रेनिंग सेशन पूरा करने के बाद मैं स्कूल जाता था। मेरा यह रूटीन सात सालों तक चला। हम जो मेहनत कर रहे थे वह लोगों की नजर में आने लगी थी। 2010 में महज 11 साल की उम्र में मुझे क्रिकेट खेलने के लिए अपना पहला चेक मिला था। इसके बाद भी मैं मेहनत करता रहा।

मेरा कॉम्पिटिशन अपने आप से था
- हर खेल से पहले मैंने महसूस किया कि मुझे किसी और से नहीं बल्कि खुद से कॉम्पिटिशन करना है और खुद को आने वाली हर चुनौती के लिए तैयार भी रखना है। दरअसल सारा खेल ही इस बात पर निर्भर करता है कि अाप यह जान लें कि आपकी स्ट्रेंथ क्या है और आप उसे कैसे बढ़ा सकते हैं। मैंने हमेशा अपनी तैयारी को मजबूत रखने के बारे में सोचा। इसकी एक वजह यह भी है कि मैंने महसूस किया कि जब हम मेहनत करते हैं तभी हममें बेहतर करने की जिद और क्षमता भी डेवलप होती है। अथक मेहनत परिणाम भी लाती है। मेहनत के साथ ही यह भी जरूरी है कि आप अपनी यात्रा में आने वाली किसी भी मुश्किल से विचलित न हों बल्कि उनसे सीखते जाएं। एक डेडिकेटेड लर्नर होना आपके बहुत काम आएगा। मैं भी सभी से सीखने का प्रयास करता रहता हूं।

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