ऑनलाइन डिग्री कोर्स से स्टूडेंट्स को हायर एजुकेशन से जोड़ने की कोशिश

हालांकि अभी टेक्निकल कोर्सेस के लिए ऑनलाइन डिग्री की मान्यता नहीं दी गई है।

एजुकेशन डेस्क। वर्तमान में देश में हायर एजुकेशन में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशो 25.2% है। इसे 2020 तक करीब 30% करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को उच्च शिक्षा से जोड़ना होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब ऑनलाइन माध्यम से डिग्री कोर्स संचालित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले स्टूडेंट्स को बेहतर शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी। 

अगले शैक्षणिक सत्र से ऑनलाइन डिग्री कोर्स करा सकेंगे उच्च शिक्षण संस्थान

- हायर एजुकेशन में सुधार के लिए और इसमें ज्यादा से ज्यादा छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए समय-समय पर कुछ बदलाव किए जाते रहे हैं।
- उच्च शिक्षा से ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को जोड़ने के लिए अब ऑनलाइन कोर्सेस पर जोर दिया जा रहा है।
- हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार अब उच्च शिक्षण संस्थान ऑनलाइन कोर्सेस के लिए सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और फुलटाइम डिग्री भी दे सकेंगे।
- यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2018-19 से लागू किए जाएंगे। ऑनलाइन कोर्स के डिग्री देने के प्रावधान को यूजीसी (ऑनलाइन कोर्सेस) रेगुलेशन, 2018 को मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जा रहा है।
-  हालांकि ऑनलाइन डिग्री या सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करने के लिए संस्थानों को तय किए गए विभिन्न मानकों पर खरा उतरना होगा। गौरतलब है कि अब तक ऑनलाइन कोर्स के लिए डिग्री को मान्यता नहीं मिली थी। 

टेक्निकल कोर्स के लिए अनुमति नहीं

- उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे ऑनलाइन कोर्स संचालित करने की अुनमति नहीं होगी, जिनके कॅरिकुलम में किसी प्रैक्टिकल या लैबोरेटरी आधारित प्रयोग शामिल होते हैं।
- संस्थान द्वारा सिर्फ नॉन टेक्निकल कोर्स के लिए ऑनलाइन डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट दिया जा सकेगा। इसके अलावा संस्थानों को सिर्फ पहले से संचालित हो रहे कोर्स के लिए फुल टाइम, ओपन या पार्ट टाइम ऑनलाइन डिग्री या सर्टिफिकेट देने की अनुमति होगी। 

नैक से ग्रेड और एनआईआरएफ में रैंक जरूरी

- ऑनलाइन डिग्री कोर्स संचालित करने के लिए संस्थानों को कुछ तय किए गए मानकों पर खरा उतरना होगा।
- इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल से 3.26 से 4 के बीच स्कोर मिला हो।
- इसके अलावा यह भी आवश्यक है कि संस्थान को नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क में लगातार दो साल तक शीर्ष 100 में जगह मिली हो।
- सरकारी ओपन यूनिवर्सिटी पर ये मानक लागू नहीं होंगे, लेकिन यह जरूरी है कि इन संस्थानों को नैक या संबंधित संस्था से रेटिंग मिली हो। 

लागत कम होगी और भागीदारी बढ़ेगी

- ऑनलाइन कोर्स सचांलित करने के लिए अपेक्षा के अनुसार कम संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसमें छात्र कहीं से भी जुड़ सकते हैं।
- इससे लागत कम होगी, जिसका सीधा असर फीस में भी देखने को मिलेगा। इसके अलावा जो छात्र दूरी की वजह से अच्छे संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पाते हैं, वे भी इससे जुड़ सकेंगे।
- इससे उच्च शिक्षा में छात्रों की भागीदारी बढ़ेगी। उच्च शिक्षण संस्थान में ऑनलाइन कोर्स के विस्तार के पीछे सरकार का उद्देश्य हायर एजुकेशन में छात्रों की भागीदारी बढ़ाना और ग्रॉस एनरोलमेंट रेशो 2020 तक 30 फीसदी तक करना है। वर्तमान में यह करीब 25.2 फीसदी है। 

ऑनलाइन कोर्स के लिए लॉन्च किया था पोर्टल

- सरकार द्वारा ऑनलाइन कोर्स के विस्तार के लिए पहले से प्रयास किए जा रहे हैं।
-  इससे पूर्व स्वयं पोर्टल की शुरुआत की गई थी। इस पोर्टल को कंप्यूटर और स्मार्टफोन के माध्यम से उपयोग किया जा सकता है।
- इसमें विभिन्न सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जाते हैं और विभिन्न संस्थानों का स्टडी मटीरियल ऑनलाइन मुहैया कराया जाता है।
- इसके अलावा कुछ उच्च संस्थानों ने हाल ही में अपने ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए थे।

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