जब पहली बार मुंबई आया था तो जेब में सिर्फ 37 रुपए थे: अनुपम खेर

First Person : अभिनेता अनुपम खेर ने शेयर किए जीवन और फिल्मी करियर से जुड़े अनुभव।

करियर डेस्क।  जब मैं पहली बार मुंबई आया था तो मेरी जेब में सिर्फ 37 रुपए थे। यहां आने से पहले मैं टीचर था तो आदर और सम्मान का आदी था। जैसे ही मैंने मुंबई में ट्रेन से उतरकर प्लेटफॉर्म पर कदम रखा तो एहसास हुआ कि यहां मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं है। तब मैंने ठाना कि इस भीड़ से अलग होने के लिए अपनी पहचान बनानी ही होगी। इस सफर में मैंने कई असफलताओं का सामना किया। इसीलिए सक्सेस थोड़ी ऊबाऊ सी भी लगती है। असल में अगर असफलता को सकारात्मक तरीके से लिया जाए तो वही आपकी सबसे बड़ी ताकत बनती है।

कमियों को बनाएं अपनी ताकत

आपने कितना भी अच्छा काम किया हो, लेकिन लोग सबसे पहले कमजोरियां ही गिनाते हैं। मुंबई आकर मैं यह समझ चुका था। उस वक्त मैंने तय किया कि मैं दुनिया का पहला ऐसा एक्टर बनूंगा, जो खुद अपनी कमियों के बारे में खुलकर बताएगा। मैंने ऑटोबायोग्राफी लिखने के बजाय खुद पर एक थियेटर स्क्रिप्ट लिखी और अपनी सारी कमियाें को बखूबी बताया। इस स्क्रिप्ट के पहले शो के बाद ही मुझे छोटे अवाॅर्ड से लेकर पद्मश्री तक सारी बड़ी उपलब्धियां मिलीं। इसके जरिए मैं एक नए अनुपम के रूप में उभरकर सामने आया।

सही अवसर पर करें खुद को साबित

जब मुझे फेशियल पाल्सी नामक बीमारी हुई तो डॉक्टरों ने दो महीने तक आराम करने को कहा। इस बीमारी में चेहरे की मांसपेशियों में तनाव आ जाता है। उस वक्त मुझे हम आपके हैं कौन फिल्म की शूटिंग करनी थी, लाखों के सेट की व्यवस्था भी हो चुकी थी। मैं चाहता तो ठीक न होने के डर के चलते रेस्ट पर चला जाता। लेकिन मैंने अपने रोल को पूरी मेहनत के साथ निभाया औरडायरेक्टर से कहा क्लोजअप के बजाय दूर से शॉट लें। इसके बाद मुझमें बहुत साहस आया। तब मैं जान पाया कि परीक्षा के समय ही आप अपनी असली क्वालिटीज को जान पाते हैं।

मेहनत का विकल्प नहीं

अक्सर खुद के जैसा बने रहने में आपको डर लगता है। ऐसा करके आप अपनी ताकतों को पहचान नहीं पाते। जबकि यही ताकतें आपको तरक्की का रास्ता देती हैं। एनएसडी से पढ़ाई के बाद मुझे भरोसा था कि मुझे तो काम मिल ही जाएगा। छोटी उम्र में ही मेरे बाल उड़ना शुरू हो गए थे। कई लाेगों ने सलाह दी कि एक्टिंग का सपना छोड़कर कुछ और काम खोजो। लेकिन मुझे अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा था। मैंने मेहनत करना नहीं छोड़ा। कुछ समय जरूर लगा, लेकिन मुझे सफलता मिली।

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