बीएड कॉलेजों में एडमिशन प्रोसेस शुरू, अप्लाय करने के लिए बैचलर डिग्री में 50% जरूरी

न्यूनतम अर्हता से कम के आवेदनों को रद्द किया जाएगा

एजुकेशन डेस्क, पटना। बिहार के बीएड कॉलेजों में नामांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के 314 कॉलेजों में नामांकन के लिए 15 जुलाई को संयुक्त प्रवेश एग्जामहोगी। इसमें भाग लेने के लिए नालंदा खुला विश्वविद्यालय ने न्यूनतम अर्हता निर्धारित कर दी है। इस संबंध में सीईटी के नोडल पदाधिकारी प्रो. एसपी सिन्हा ने बताया कि न्यूनतम अर्हता से कम के आवेदनों को रद्द कर दिया जाएगा। अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, नि:शक्तजन, पिछड़े वर्ग की महिलाएं और अन्य श्रेणियों के लिए योग्यता में छूट और सीटों में आरक्षण बिहार सरकार के नियमानुसार होगा। 

रेगुलर मोड के लिए अर्हता 
- विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी में सामान्य व पिछड़ा वर्ग के स्टूडेंट्स को न्यूनतम 50% मार्क्स के साथ स्नातक या बीई एवं बीटेक में गणित व विज्ञान के स्टूडेंट्स के लिए न्यूनतम 55% अंक चाहिए। जबकि अन्य श्रेणियों में पांच परसेंटमार्क्स की छूट रहेगी। 
- कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय या उसके कॉलेजों में बीएड में प्रवेश के इच्छुक स्टूडेंट्स को 50 परसेंट मार्क्स के साथ विश्वविद्यालय की तीन वर्षीय शास्त्री एग्जाममें उत्तीर्ण या दो वर्षीय शास्त्री एग्जाम सत्र 1990 तक या किसी अन्य मान्य विश्वविद्यालय से शास्त्री त्रिवर्षीय स्नातक एग्जाममें संस्कृत सहित उत्तीर्ण होने चाहिए। 

डिस्टेंस मोड के लिए योग्यता 
- दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीएड कोर्स में नामांकन लेने के लिए अनारक्षित श्रेणी के स्टूडेंट्स को कम से कम 50 प्रतिशत तथा आरक्षित श्रेणी के स्टूडेंट्स के लिए कम से कम 45 प्रतिशत मार्क्स के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक पास होना आवश्यक है। जबकि अनारक्षित अभियंत्रण स्नातक के लिए 55 प्रतिशत तथा आरक्षित अभियंत्रण स्नातक के लिए 50 प्रतिशत अनिवार्य है। 

एनओयू में नामांकन के लिए 
- वैसे कार्यरत शिक्षक जो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा स्थायी मान्यता प्राप्त प्राइमरी विद्यालय में स्थायी या अस्थायी अप्रशिक्षित अध्यापक हों, वैध होंगे। 
- मान्यता प्राप्त प्राइमरी, मिडिल, सेकेंड्री या हायर सेकेंड्री विद्यालय में स्थायी या अस्थायी सेवारत अभ्यर्थी जिन्होंने एनसीटीई से मान्यता प्राप्त नियमित रीति (फेस-टू-फेस) से अध्यापक शिक्षा का कोई कार्यक्रम पूरा किया हो। 
- मान्यता प्राप्त प्राइमरी, मिडिल, सेकेंडरी या हायर सेकेंडरी विद्यालय में कार्यरत स्थायी या अस्थायी अप्रशिक्षित शिक्षक, जिन्होंने कम से कम दो वर्षों के शिक्षण का सवैतनिक अनुभव दिनांक 31.05.2016 तक लिया है। 

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