भास्कर इंटरव्यू / सीबीएसई 12वीं की 5 टॉपर्स ने बताए कामयाबी के राज

सोशल मीडिया से दूरी, कोचिंग की बजाय सेल्फ स्टडी

पानीपत/गाजियाबाद/मुजफ्फरनगर/अलवर। सीबीएसई 12वीं के नतीजों में टॉप-2 पोजिशन पर 5 लड़कियों ने जगह बनाई है। इन टॉपर्स के बीच कॉमन यह है कि वे सोशल मीडिया अकाउंट्स से दूरी बनाए रखती हैं। ट्यूशंस की बजाय सेल्फ स्टडी पर इन्हें ज्यादा भरोसा है। तीन टॉपर्स का कहना है कि वे सिविल सेवाओं में अपना करियर बनाना चाहती हैं। दो टॉपर्स ऐसी हैं जो 10वीं में भी 10 सीजीपीए हासिल कर चुकी हैं। भास्कर प्लस ऐप ने इन टॉपर्स से बातचीत की।

करिश्मा अरोड़ा : डांस थैरेपिस्ट बनने का लक्ष्य
- मुजफ्फरनगर की रहने वाली करिश्मा अरोड़ा को 500 में से 499 नंबर मिले हैं। सिर्फ एक नंबर इकोनॉमिक्स में कटा। करिश्मा ने 10वीं में भी 10 सीजीपीए हासिल कर स्कूल में टॉप किया था।  
दूसरों से क्या अलग : जब जैसा मन किया, वैसी पढ़ाई की। परीक्षा से दो महीने पहले से रोजाना औसतन पांच से आठ घंटे पढ़ाई की। कोचिंग नहीं की। सेल्फ स्टडी पर ही फोकस किया। वे कहती हैं कि मेरा सोशल मीडिया पर अकाउंट है, लेकिन उस पर ज्यादा एक्टिव नहीं रहती। अपना समय पढ़ाई में लगाती हूं।  
लक्ष्य : करिश्मा कहती हैं कि वे डांस थैरेपिस्ट बनना चाहती हैं। बीते 7 साल से दिल्ली की कथक गुरु गीतांजलि लाल से तालीम ले रही हैं।  
परिवार : पिता मनोज कुमार अरोड़ा जैविक खाद बनाने का कारोबार करते हैं। वे जिस स्कूल से पासआउट हैं, करिश्मा वहीं से टॉपर बनी हैं। उनकी मां मोनिका गृहिणी हैं। बड़ी बहन भूमिका दिल्ली में पढ़ाई करती है।

हंसिका शुक्ला : म्यूजिक को सब्जेक्ट चुना, 100 नंबर हासिल किए
- गाजियाबाद की रहने वाली हंसिका शुक्ला 500 में से 499 नंबर लाकर टॉपर हैं। उन्हें पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री, साइकोलॉजी और म्यूजिक में 100 अंक मिले हैं। सिर्फ अंग्रेजी में 99 नंबर मिले हैं।  
दूसरों से क्या अलग : फोन और सोशल मीडिया से दूर बनाए रखी। कोचिंग नहीं ली। पढ़ाई के साथ-साथ संगीत, बैडमिंटन और तैराकी को जारी रखा।  
लक्ष्य : हंसिका कहती हैं कि साइकोलॉजी में आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं। यूपीएससी देकर भारतीय विदेश सेवा में जाना चाहती हूं।
परिवार : हंसिका की मां डॉ. मीना शुक्ला गाजियाबाद के डिग्री कॉलेज में टीचर हैं। पिता डॉ. साकेत कुमार राज्यसभा में सेक्रेटरी हैं।   

भव्या भाटिया : पढ़ाई के लिए कभी घंटे तय नहीं किए
- भव्या भाटिया पानीपत के उरलाना कलां गांव की रहने वाली हैं। वे सफीदों कस्बे के एक स्कूल की छात्रा हैं। भव्या को 500 में से 498 नंबर मिले हैं। 10वीं में भी भव्या ने 10 सीजीपीए हासिल किया था।  
दूसरों से क्या अलग : पढ़ाई में अड़चन न आए, इसलिए भव्या ने सोशल मीडिया पर कोई अकाउंट नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि जब कभी दोस्तों से स्टडी मटेरियल की जरूरत पड़ी तो उसे मां के वॉट्सऐप पर मंगवाया। वे घंटों के हिसाब से पढ़ाई नहीं करतीं। बचपन से आज तक कभी ट्यूशन नहीं ली। पढ़ाई मां और दादी ने करवाई।  
लक्ष्य : भव्या का कहना है कि वे यूपीएससी की तैयारी करना चाहती हैं। अच्छा रिजल्ट आने से इरादा और मजबूत हो गया है।  
परिवार : भव्या के पिता विकास कुमार की सफीदों में बुक शॉप है। मां रंजू भाटिया प्राइवेट स्कूल टीचर हैं। दादा यशपाल भाटिया खेतीबाड़ी करते हैं, दादी राधा रानी सरकारी स्कूल से टीचर से रिटायर्ड हैं। छोटा भाई हार्दिक 12वीं कक्षा में है।

ऐश्वर्या सिन्हा : काॅम्पीटिशन में जरूरत पड़ी, तब स्मार्टफोन का इस्तेमाल शुरू किया
- रायबरेली के केंद्रीय विद्यालय की छात्रा ऐश्वर्या सिन्हा ने 500 में से 498 अंक हासिल किए हैं और वे दूसरी रैंक पर हैं।  
दूसराें से क्या अलग : ऐश्वर्या के घर में न टीवी है, न ही मनोरंजन का कोई अन्य साधन। वे कहती हैं कि 2017 में यूनिवर्सल कॉन्सेप्ट ऑफ मेंटल अर्थमैटिक कॉम्पीटिशन में हिस्सा लेना था। इसके लिए स्मार्टफोन की जरूरत थी। तब फोन खरीदा। लेकिन स्मार्टफोन लेने के बाद भी सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। सेल्फ स्टडी के साथ-साथ टीचर्स से लगातार बातचीत की। उनके सुझावों पर ध्यान दिया।  
लक्ष्य : ऐश्वर्या यूपीएएसी क्लियर कर आईएएस बनना चाहती हैं।
परिवार : पिता संजय सिन्हा स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं। छोटा भाई अमोल भी केंद्रीय विद्यालय में ही पढ़ता है।

तिशा : जन्मदिन से एक दिन पहले आया रिजल्ट, राजस्थान की टॉपर बनीं
- अलवर की रहने वाली तिशा गुप्ता 500 में से 497 नंबर लाकर तीसरी रैंक पर हैं। वे राजस्थान की टॉपर भी हैं। शुक्रवार को उनका जन्मदिन है।
दूसरों से क्या अलग : क्लासरूम स्टडी पर ही फोकस किया। भाई से मदद ली, जिसने पढ़ाई का शेड्यूल बनाकर दिया।
तिशा कहती हैं- जितना स्कूल में पढ़कर आते हैं उसे सही तरीके से घर पढ़ लें तो कोई परेशान नहीं। यहीं आपका 80 प्रतिशत पढ़ाई पूरी हो जाती है। वे कहती हैं कि सफलता के लिए सुविधाओं का होना या नहीं होना ज्यादा मायने नहीं रखता।
परिवार : तिशा के पिता भीम सिंह गुप्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेल नर्स हैं। मां चित्रा गुप्ता गृहिणी हैं।

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